
रांची। महालया के पावन अवसर पर शनिवार की शाम श्री दुर्गाबाड़ी में संगीतायन की ओर से भव्य संगीत-नृत्य आलेख्य महिषासुर मर्दिनी का मंचन किया गया। कार्यक्रम में मां दुर्गा की महिमा, महिषासुर वध की पौराणिक गाथा और आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों को संगीत, चंडीपाठ और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। करीब 70 कलाकारों की सहभागिता वाली इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरूआत श्री दुर्गाबाड़ी के सचिव गोपाल भट्टाचार्य द्वारा कलाकारों और अतिथियों के स्वागत से हुई। संगीतायन की इस प्रस्तुति में देवी दुर्गा की उत्पत्ति, उनके विभिन्न स्वरूपों, देवताओं पर अत्याचार करने वाले असुरों और महिषासुर के वध की कथा को प्रभावशाली ढंग से पिरोया गया। मधुर संगीत, लयबद्ध नृत्य, भव्य वेशभूषा और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था ने मंचन को विशेष बना दिया।
पारंपरिक चंडीपाठ और आगमोनी की स्वर लहरियों ने महालया के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल को और भी जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का संयोजन सुदेशना चौधुरी ने किया, जबकि संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी शंकर कुमार मंडल ने संभाली। चंडीपाठ एवं मंच संचालन शिवांशु दासगुप्ता ने किया। सुदेशना चौधुरी, सुदीप्ता चक्रवर्ती, मौसमी मल्लिक, वेदत्रयी सरकार, कृष्णा सेनगुप्ता, अशोक कुमार बिस्वास, मानस बनर्जी, अविजित बिस्वास, शंकर कुमार मंडल और शिवांशु दासगुप्ता ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। निबेदिता डांस एकेडमी की ओर से विशेष नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसकी कोरियोग्राफी त्रिशा तान्या सेन ने की। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के सेतांक सेन, संदीप चौधुरी, श्यामल रॉय, प्रदीप रॉय, जयंत कर, देवनाथ गांगुली, अमित राय, रविंद्र बनर्जी, संजय राय, दीपेंद्र नारायण घोष, अमरनाथ चक्रवर्ती, तरुण और सूत्रधर नारायण प्रमाणिक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह जानकारी प्रवक्ता प्रदीप रॉय ने दी।

