
रांची। झारखंड के नवनियुक्त शिक्षक (सहायक आचार्य) प्रदीप कुमार यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नियुक्ति पत्र लेने के मौके पर अपने अनुभव साझा किया। प्रदीप यादव ने बताया कि वो अब तक सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सिर्फ टीवी स्क्रीन या न्यूज़पेपर की हेडलाइंस में ही देखते रहे थे। आज के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में सीधे सीएम के समक्ष खड़ा होकर उनसे मिलने और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने का मौका मिलना गर्व की बात और उत्साह का पल है।



बिना एक रुपया दिए बेटे को मिली सरकारी नौकरी : नवनियुक्त शिक्षक प्रदीप यादव ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जिस दिन इस नियुक्ति का रिजल्ट आया, उसके बाद न्यूज़ पेपर में उनकी मां ने सीएम हेमंत सोरेन की तस्वीर देखी, तो मां ने भावुक होकर उनकी तस्वीर को तीन बार प्रणाम किया। उनकी मां आज भी उस न्यूज़पेपर की प्रति को संजो कर रखी है। प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री से कहा कि उनकी मां इस बात के लिए बहुत खुश है कि कहीं एक रुपया दिए बिना ही इतने पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से भर्ती हुई है। उन्होंने बताया कि उनके पिता इस दुनिया में नहीं है। उनकी मां ने उसे यही कहा है कि बेटा जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने न्याय किया है, उसी प्रकार पूरी ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना।
इस मौके पर सीएम हेमंत सोरेन ने ने रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में प्रदीप यादव समेत 1042 नव चयनित इंटर और स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों का नियुक्ति-पत्र सौंपा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आने वाले समय में राज्य के बौद्धिक क्षेत्र का आयाम कैसा हो और हमारे आने वाली पीढ़ी अपने पैरों पर कैसे खड़ी हो, यह अब आप सभी नव नियुक्त सहायक शिक्षकों को तय करना है। आज से आप राज्य सरकार के अभिन्न अंग के रूप में कार्य करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड किस प्रकार अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आकर खड़ा हो, यह आपकी जिम्मेवारी है। राज्य सरकार ने आप नव नियुक्त शिक्षकों को केवल नौकरी नही, बल्कि राज्य की भावी पीढ़ी का भविष्य गढ़ने की एक महत्त्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी संस्थानों की कमियों-खामियों पर अक्सर उंगलियां उठती हैं, जिनमें से कुछ सही होती हैं तो कई गलत। झारखंड सरकार की जिम्मेवारी राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों के प्रति है,जिसमें अधिकारी, कर्मचारी, बुजुर्ग, किसान, महिलाएं, नौजवान और छात्र शामिल हैं। यहां तक कि हवा, पानी सहित मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के विकास की जिम्मेवारी भी जनता की ओर से चुनी गई सरकार की है, लेकिन, एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि नागरिकों की भी अपनी अलग जिम्मेवारी है। यदि सभी लोग एक जिम्मेवार नागरिक के रूप में व्यवहार करें और अपना ‘सिविक सेंस’ मजबूत करें, तो व्यवस्था में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

