
नयी दिल्ली ।देश की रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का निरीक्षण किया और दिल्ली से श्रीनगर तक चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन वैष्णो देवी की आधारभूमि कटरा होते हुए घाटी तक पहुंचेगी, जो कश्मीर को पहली बार सीधी रेल सेवा से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी।
चिनाब पर बना दुनिया का अजूबा पुल : यह रेलमार्ग दो अद्भुत इंजीनियरिंग चमत्कारों का हिस्सा है—पहला, चिनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, जो एफिल टॉवर से भी ऊंचा है। दूसरा, भारत का पहला केबल-स्टे रेल पुल जो अंजी नदी पर बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने चिनाब पुल के निरीक्षण के दौरान इंजीनियरों और अधिकारियों से बातचीत कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी।
तीन दशकों की मेहनत, 44 हज़ार करोड़ खर्च : 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना को पूरा होने में तीन दशक लगे हैं। इसकी शुरुआत 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव की अध्यक्षता में हुई और असली गति 2002 में वाजपेयी सरकार के दौरान मिली। इस प्रोजेक्ट पर अब तक कुल ₹43,780 करोड़ खर्च हो चुके हैं। इसमें 36 सुरंगें (कुल लंबाई 119 किमी) और 943 पुल शामिल हैं, जो दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों को जोड़ते हैं।
अब नहीं कटेगा कश्मीर : हर साल सर्दियों में जम्मू-श्रीनगर हाईवे बर्फबारी के कारण बंद हो जाता है, जिससे घाटी देश से कट जाती है और हवाई किराए आसमान छूने लगते हैं। यह रेलवे लिंक उस कटााव को स्थायी रूप से खत्म करेगा। साथ ही यह कश्मीर में पर्यटन, व्यापार और रोज़गार के नए रास्ते खोलेगा। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, यह रेलमार्ग न केवल देश की सबसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में बना है, बल्कि यह भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक भी है।
