नयी दिल्ली:  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में झटका लगने के बाद केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वर्ष 2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन की कवायद में ‘हिंदी पट्टी के लिए भारी बहुमत’ सृजित करने के बारे में शायद नहीं सोचे।

यहां हिंदी पट्टी के लिए ‘भारी बहुमत’ सृजित करने से आशय इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोकसभा सीट के सृजन से है। राधा कुमार की पुस्तक ‘द रिपब्लिक रिलर्न्ट : रिन्यूइंग इंडियन डेमोक्रेसी (1947-2024)’ के विमोचन के अवसर थरूर ने कहा कि जब परिसीमन कवायद की बात आती है, तो संघवाद से लेकर राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने तक चिंता की कई बातें हैं।

थरूर ने कहा, ”यह (परिसीमन) एक ऐसा विषय है जिसके बारे में मुझे उम्मीद है कि सत्ता में बैठे लोगों की सामान्य बुद्धि और विवेक से लाभ मिलेगा, जो अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बारे में सोचकर निश्चित रूप से बहुत बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं।

लेकिन अब उत्तर प्रदेश ने उन्हें यह सिखा दिया है कि हिंदी पट्टी से भी झटका लग सकता है… तो हो सकता है कि वे (भाजपा) अपने हित में हिंदी पट्टी के लिए ‘भारी बहुमत’ सृजित करने को लेकर उतने उत्साहित न हों।”

परिसीमन से आशय लोकसभा और विधानसभाओं के लिए प्रत्येक राज्य में सीट संख्या और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया से है। परिसीमन को वर्ष 2026 के बाद की पहली जनगणना के आधार पर किया जाना है।

हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीट में से केवल 33 सीट जीतीं. तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद थरूर ने केंद्र सरकार को जनसंख्या को परिसीमन की एक मात्र कसौटी बनाने के प्रति आगाह किया, क्योंकि इससे दक्षिण के लोग अधिकारों से वंचित महसूस करेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सरकार का जनसांख्यिकी आंकड़ों का उपयोग कर हिंदी पट्टी को दो तिहाई बहुमत देने के प्रलोभन में पड़ना देश की एकता के लिए ‘खतरनाक कदम’ हो सकता है।

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