
भुरकुंडा (रामगढ़)। महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर ओपी जिंदल स्कूल पतरातू में शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस उत्साह, उमंग और खेलभावना के साथ मनाया गया। विद्यालय के सीनियर एवं प्राइमरी विंग में आयोजित विभिन्न खेल गतिविधियों ने पूरे परिसर को ऊर्जा और उल्लास से भर दिया। सीनियर विंग के विद्यार्थियों के लिए अंतर-सदनीय मिनी मैराथन का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने पूरे जोश और दृढ़ संकल्प के साथ दौड़ में हिस्सा लिया तथा अपनी सहनशक्ति, अनुशासन, धैर्य और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का परिचय दिया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को मेजर ध्यानचंद के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समर्पण, निरंतर प्रयास और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया गया।
जिंदल स्टील पतरातू के प्लांट प्रमुख केबी सिंह ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खेल जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम वर्क, नेतृत्व, संघर्षशीलता और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि जीत और हार खेल का हिस्सा हैं, लेकिन खेल में ईमानदारी, समर्पण और निरंतर प्रयास ही वास्तविक सफलता की पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। श्री सिंह ने मेजर ध्यानचंद के जीवन और उपलब्धियों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनकी मेहनत, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण से सीख लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मैदान में सीखे अनुशासन, सहयोग और संघर्ष के मूल्यों को जीवन के हर क्षेत्र में अपनाना चाहिए। राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह स्वास्थ्य, सक्रिय जीवनशैली और सकारात्मक खेलभावना का उत्सव बन गया। पूरे विद्यालय परिसर में गूंजती तालियों और उत्साहपूर्ण जयघोष के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ। वहीं, प्राइमरी विंग में नन्हे विद्यार्थियों के लिए 50 मीटर एवं 100 मीटर दौड़ सहित विभिन्न मनोरंजक एथलेटिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। फ्रॉग जंप रेस (मेढक दौड़) बच्चों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नन्हे प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और खिलखिलाती मुस्कान ने वातावरण को आनंदमय बना दिया। प्रधानाचार्य संतोष चौधरी ने विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य, नेतृत्व क्षमता, सहयोग और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस विकसित होता है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर, दृढ़ मन, अनुशासित व्यक्तित्व और सच्ची खेलभावना ही समग्र एवं उत्कृष्ट शिक्षा की मजबूत आधारशिला हैं।
