पटना। बिहार सरकार अब गांवों के साथ-साथ शहरों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराएगी। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इससे जुड़े संशोधित नियमों को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से जमीन का रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी, सटीक और आधुनिक बनेगा। इसके अलावा लोकहित परियोजनाओं के लिए नई भूमि खरीद नीति को भी मंजूरी दी गई है। मंत्रिमंडल ने विधायकों और सरकारी कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर ल

शहरी इलाकों में भी तैयार होगा नया खतियान और नक्शा : मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब शहरी क्षेत्रों में भी विशेष भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा। अभी तक राज्य में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती और अन्य प्रकार की जमीन का नया खतियान और भू-नक्शा तैयार किया जा रहा था। सर्वेक्षण के दौरान कई ऐसे प्रावधान सामने आए, जिनमें बदलाव की जरूरत महसूस की गई। इसी को देखते हुए नियमों में संशोधन किया गया है।

नए नियमों से सर्वे होगा तेज और पारदर्शी : नई नियमावली में कुछ पुराने प्रावधानों में बदलाव, कुछ नए प्रावधान जोड़ने और अप्रासंगिक नियमों को हटाने का निर्णय लिया गया है। भू-सर्वेक्षण से जुड़े कई नए शब्दों की स्पष्ट परिभाषा भी तय की जाएगी, ताकि भ्रम की स्थिति न बने। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से नगर निकाय क्षेत्रों सहित पूरे राज्य में भू-सर्वेक्षण का काम आसान और तेज होगा। साथ ही जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अधिक भरोसेमंद और आधुनिक बन सकेंगे।

राज्य मंत्रिमंडल ने लोकहित की केंद्रीय और राज्य परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने हेतु बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 लागू करने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने पर आपसी सहमति और बातचीत के आधार पर रैयतों से सीधे भूमि खरीदी जाएगी। शहरी क्षेत्रों में जमीन का मूल्य बाजार मूल्य या सर्किल रेट में जो अधिक होगा, उसके दो गुना के बराबर तय किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक भुगतान किया जाएगा।

जमीन खरीद पर स्टांप शुल्क नहीं लगेगा : सरकार ने यह भी तय किया है कि इस नीति के तहत खरीदी जाने वाली जमीन को स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। साथ ही रैयतों को भी पारदर्शी और बेहतर मुआवजा मिल सकेगा।

विधायकों और सरकारी कर्मियों को कैशलेस इलाज : मंत्रिमंडल ने बिहार विधान मंडल के वर्तमान एवं पूर्व सदस्यों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, राज्य सरकार के नियमित कर्मियों, पेंशनधारियों तथा उनके आश्रितों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने स्वास्थ्य योजना के तहत अंतवार्सी (इनडोर) चिकित्सा के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा देने का फैसला किया है। इससे अस्पताल में भर्ती होने पर लाभार्थियों को तत्काल भुगतान नहीं करना पड़ेगा और इलाज की प्रक्रिया अधिक आसान होगी।

छोटे अस्पतालों के लिए नई विनियमावली लागू: राज्य सरकार ने 40 बेड तक के छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए ह्लबिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान विनियमावली 2026ह्व को भी मंजूरी दी है। इसके तहत अस्पतालों, क्लीनिक, जांच केंद्रों और डिस्पेंसरी के पंजीकरण एवं संचालन के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। राज्य और जिला स्तर पर अलग-अलग पंजीकरण प्राधिकार भी गठित किए जाएंगे।

पांच स्टेट हाईवे और सिंचाई योजनाओं को मंजूरी : मंत्रिमंडल ने राज्य में पांच स्टेट हाईवे परियोजनाओं के लिए 3744 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। पश्चिमी कोसी सिंचाई योजना के आधुनिकीकरण के लिए 606 करोड़ रुपये तथा झंझारपुर शाखा नहर परियोजना के लिए 218 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।इसके अलावा निबंधन एवं परामर्श केंद्रों के रखरखाव के लिए 65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

पीएमसीएच में बनेगी स्पाइन सब स्पेशलिटी यूनिट
कैबिनेट ने पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वतंत्र स्पाइन सब स्पेशलिटी यूनिट की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 39 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। वहीं पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के उपयोग के लिए 10 नई ईवी और हाइब्रिड कार खरीदने के लिए 3.70 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

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