
रांची। पलामू जिले के अति नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्र टंडवा यूनिट-18 में केंदू पत्ता खरीद को लेकर भारी अनियमितता और मजदूरों के शोषण का मामला सामने आया है। इस यूनिट के अंतर्गत सिंहटूटा, कुशहा, घिरसिरी, घंघरी एवं मध्या गांव शामिल हैं, जहां केंदू पत्ता खरीद का कार्य ठेकेदार भूषण प्रसाद की ओर से किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल क्षेत्र और अशिक्षा का फायदा उठाकर ठेकेदार सरकारी नियमों को छुपाते हुए मनमाने तरीके से भुगतान कर रहे हैं।
केंदू पत्ता बेचने पहुंची पार्वती देवी, शारदा देवी, रीना देवी, रजिया देवी, सरिता देवी, राजमतिया देवी, मनमतिया कुंवर, ललिता देवी, मूसनी देवी, सुनैना देवी, अनीता देवी सहित अन्य महिलाओं ने गुरूवार को बताया कि उन्हें सरकारी निर्धारित दर की जानकारी नहीं दी जाती। ठेकेदार यह कहकर कम पैसा दिया जा रहा है कि पोला में पत्ती कम है।
महिलाओं का कहना है कि वे इस भीषण गर्मी में प्रतिदिन जंगलों से मशक्कत कर 40 से 45 पत्तों का पोला तैयार करती हैं, लेकिन उन्हें प्रति सैकड़ा मात्र 140 से 150 रुपये ही भुगतान किया जा रहा है, जबकि सरकार की ओर से निर्धारित राशि 203 रुपये बताई गई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मजदूरों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं और सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। मजदूरों का कहना है कि ठेकेदार केवल अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं और गरीब आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।
प्रमंडलीय प्रबंधक, लघु वन पदार्थ परियोजना प्रमंडल मेदिनीनगर केके सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि केंदू पत्ता संग्रहण में मजदूरों के साथ किसी भी प्रकार की मनमानी या शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से केंदू पत्ता खरीद के लिए स्पष्ट मानक और दर निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार एक पोला में 52 पत्ते होना अनिवार्य है और प्रति सैकड़ा 203 रुपये की राशि तय की गई है।

