
नवसारी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के नवसारी में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे लिए आराम हराम है सिर्फ एक नारा नहीं है बल्कि पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करता है और लोगों की सेवा के लिए हरसंभव प्रयास करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने नवसारी के प्रति अपना लगाव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि एक बार फिर नवसारी आने का मौका मिला है और इससे उन्हें बेहद खुशी हो रही है। पार्टी कार्यकतार्ओं से मिलना उनके लिए हमेशा खास होता है। कार्यकतार्ओं से मिलने और उनसे बातचीत करने का अवसर उत्साह से भर देता है। यह सौभाग्य है कि हमारे पास समर्पित कार्यकतार्ओं की ऐसी फौज है, जो दिन-रात एक ही उद्देश्य के साथ काम करती है। भारत माता की जय के उद्घोष के साथ उनका एकमात्र सपना 140 करोड़ देशवासियों का कल्याण है और इसके लिए उन्होंने सेवा का रास्ता चुना है। पीएम मोदी ने कहा कि ह्लसत्ता सेवा के लिए है, संगठन सेवा के लिए है, पद सेवा के लिए है, प्रतिष्ठा सेवा के लिए है और पूरी व्यवस्था सेवा के लिए है। मोदी ने लोगों की भलाई के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। सुकन्या समृद्धि योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने शुरूआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि जब लोगों ने उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया, तब वह भीषण गर्मी में गांवों का दौरा करते थे। उस समय गांवों में 24 घंटे बिजली की सुविधा नहीं थी और सीलिंग फैन भी लगभग न के बराबर थे। वह गांवों में जाकर बेटियों की शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक करते थे। छोटी बच्चियों का हाथ पकड़कर उन्हें स्कूल ले जाते और उनके माता-पिता को उन्हें पढ़ाने के लिए प्रेरित करते थे। मोदी ने कहा कि उस समय उन्हें इस बात की खुशी होती थी कि यह उनकी जिम्मेदारी है और वह उसे निभा रहे हैं। यह जमीनी स्तर पर किया जाने वाला ऐसा साधारण काम था, जो न तो अखबारों में सुर्खियां बनता था और न ही टेलीविजन पर दिखाई देता था। मीडिया का भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता था। इसके बावजूद पूरी लगन और विश्वास के साथ यह काम साल-दर-साल जारी रहा। मोदी ने रेहड़ी-पटरी और हाथ- ठेला चलाने वाले लोगों की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे लोगों को कारोबार शुरू करने के लिए साहूकारों से ब्याज पर पैसे लेने पड़ते थे। कई बार कोई व्यक्ति 1,000 रुपए का कर्ज मांगता था लेकिन साहूकार उसे केवल 900 रुपये देता था। इसके बाद दिनभर सामान बेचने के बाद उसे ब्याज समेत रकम लौटानी पड़ती थी। इस तरह ब्याज के बोझ तले रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे दुकानदार दबे रहते थे और उनके पास परिवार चलाने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं बचता था। हमने तय किया कि भाई, इनकी ईमानदारी पर शक मत करो। बिना किसी गिरवी या गारंटी के इन लोगों के लिए बैंक खाते खोलने, सीधे बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने और डिजिटल भुगतान की सुविधा देने की व्यवस्था बनाई गई। आज लाखों रेहड़ी-पटरी और हाथ-ठेला चलाने वाले ऐसे हैं, जिन्होंने शुरूआती ऋण को समय पर चुकाया है। इसी वजह से उन्हें आगे 30,000 रुपए और फिर 50,000 रुपए तक का ऋण मिल सका। उन्होंने कहा कि सेवा कभी बेकार नहीं जाती। समाज इतना उदार है कि वह मिले हुए सहयोग को कभी नहीं भूलता और अपने आशीर्वाद के जरिए उसका कर्ज चुकाता है। लोगों का आशीर्वाद हर दिन उनके भीतर कुछ नया करने की शक्ति और प्रेरणा पैदा करता है। यही प्रेरणा उन्हें कड़ी मेहनत करने और नए लक्ष्य हासिल करने का हौसला देती है।




