
गयाजी। पितृपक्ष के अवसर पर मोक्षभूमि गयाजी में शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया। पूजा-अर्चना के दौरान वह भावुक नजर आईं और उनकी आंखें नम हो गईं। स्मिता ठाकरे ने बताया कि उन्होंने अपने ससुर बाल ठाकरे, पिता मधुकर चित्रे और सास की आत्मा की शांति के लिए आज यहां पिंडदान किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं।बिहार-महाराष्ट्र के सांस्कृतिक संबंध: स्मिता ठाकरे ने कहा कि सीता माता की कथा से उन्हें प्रेरणा मिली कि महिलाएं भी अपने पितरों का तर्पण कर सकती हैं। उन्होंने गयाजी की पावन धरती, स्थानीय प्रशासन, पंडा समाज और लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और बिहार के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंध बेहद मजबूत हैं। माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा सुनी तो हिम्मत मिली: बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकुर ने कहा कि गया आने का सौभाग्य शायद कम लोगों को मिलता है। उन्होंने इसके लिए अपने परमपूज्य श्री गुरुजी, श्री श्री तुलसी जी महाराज और संतों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी और संतों ने उन्हें धीरज दिया और इसी वजह से वह यहां आ सकीं। उन्होंने कहा कि पहले उनके मन में यह धारणा थी कि शायद महिलाएं पिंडदान नहीं करतीं। लेकिन जब उन्होंने माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा सुनी तो उन्हें भी हिम्मत मिली। इसके बाद उन्होंने भी पिंडदान करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उनका अपने परमपूज्य श्री गुरुजी से गहरा लगाव और सहवास रहा है। उनके विचारों से वह हमेशा प्रभावित रही हैं और उन्हीं विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि गया जैसी पवित्र धरती पर आकर उन्हें इस परंपरा और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिला है।बाला साहेब हमेशा ईमानदारी से काम करने की सीख देते थे: राजनीति से जुड़े सवाल पर स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह सीधे राजनीति में नहीं रही हैं और समाजसेवा के माध्यम से लोगों के बीच काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे हमेशा ईमानदारी से काम करने और समाज के हर वर्ग की सेवा करने की सीख देते थे।

