रांची। झारखंड के रामगढ़ जिले में रजरप्पा स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मां छिन्नमस्तिका मंदिर के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े अवमानना मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी जताई। पिछली सुनवाई में दिए निर्देश के बावजूद पर्यटन विभाग के सचिव के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

रांची, 29 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड के रामगढ़ जिले में रजरप्पा स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मां छिन्नमस्तिका मंदिर के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से जुड़े अवमानना मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी जताई। पिछली सुनवाई में दिए निर्देश के बावजूद पर्यटन विभाग के सचिव के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मंदिर के पुनरुद्धार के लिए डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड से राशि लेने की बात कही गई। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को 5 अक्टूबर को डीएमएफटी फंड से जुड़ी पूरी योजना पेश करने का निर्देश दिया। पर्यटन सचिव के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर सरकार की ओर से बताया गया कि वह नीति आयोग के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता गए हैं और उनके लिए समय देने का अनुरोध किया गया।

इससे पहले अदालत ने सचिव को 29 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। रजरप्पा मंदिर के विकास के लिए सरकार के फंड संबंधी रुख में बदलाव को लेकर भी अदालत पहले सवाल उठा चुकी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष बताया गया था कि मंदिर के विकास के लिए राज्य के संसाधनों से राशि की व्यवस्था की जाएगी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है।

बाद में केंद्र की ‘प्रसाद’ योजना से वित्तीय सहायता लेने की बात सामने आई थी। इस बदलाव पर अदालत ने सवाल उठाया था कि यदि केंद्र की योजना से राशि लेने का विचार था तो पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। यह मामला संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है।

याचिका में रजरप्पा मंदिर परिसर के विकास, सौंदर्यीकरण, बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित पूर्व के न्यायिक निर्देशों के अनुपालन की मांग की गई है। अप्रैल में हुई सुनवाई में अदालत ने मंदिर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के साथ प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। अदालत ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था और मंदिर क्षेत्र में सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कदमों पर राज्य सरकार और सीसीएल से जवाब मांगा था।

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