
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव एक बार फिर दागदार रहा। फिर चुनाव में क्रास वोटिंग हुई। तमाम माक पोल के बावजूद वोट रद भी हुए। गुरुवार को झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव में आशा के अनुरूप झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम सबसे अधिक 30 वोट लाकर विजयी हुए। मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा तथा भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी में था। इसमें परिमल कांग्रेस प्रत्याशी पर भारी पड़े। उन्होंने 28 वैध मत लाकर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को बुरी तरह पछाड़ दिया। दूसरी तरफ, प्रणव को 20 वोट मिले।
भाजपा विधायकों के दो वोट रद होने के बाद भी परिमल को 28 वोट मिले तो इसका मतलब साफ है कि वह गठबंधन के छह विधायकों को अपने पाले में लाने में सफल रहे। इस नतीजे का असर सत्तारूढ़ गठबंधन की सेहत पर भी पड़ सकता है। राज्यसभा चुनाव का यह नतीजा क्रास वोटिंग से संभव हुआ। तमाम वादे के अनुरूप सत्तारूढ़ गठबंधन अपने विधायकों को समेटने में विफल रहा। सारे प्रशिक्षण, निर्देश, सुझाव और अपील के साथ-साथ दावे धरे के धरे रह गए। सत्ताधारी महागठबंधन (झामुमो और कांग्रेस) के पास संख्या बल होने के बावजूद राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रणनीतिक किलेबंदी परिमल नाथवानी को रोकने में नाकाम रही।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजद और भाकपा माले ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया। राजद के चार तथा भाकपा माले के दो विधायकों के वोट विपक्षी खेमे के प्रत्याशी को मिल गए। हालांकि राजद और भाकपा माले ने कांग्रेस के इस आरोप को सिरे से नकारते हुए कांग्रेस विधायकों द्वारा ही क्रास वोटिंग करने का आरोप लगाया। इससे पहले, सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कोई अनुपस्थित नहीं रहा।
हालांकि मतगणना के दौरान तीन मत अमान्य घोषित कर दिए गए। इनमें दो एनडीए के विधायकों तथा एक कांग्रेस विधायक का वोट था। एनडीए विधायकों के रद दो वोट परिमल को पड़े थे। बैद्यनाथ राम झारखंड से राज्यसभा सदस्य के लिए चुने जाने वाले पहले दलित हैं। अभी तक यहां से कोई दलित चुनकर नहीं गया था। साथ ही राज्य गठन के बाद पलामू प्रमंडल से पहली बार कोई राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुआ है। झारखंड सरकार में कई टर्म मंत्री रहे बैद्यनाथ राम पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।
नथवाणी तीसरी बार झारखंड से पहुंचे राज्यसभा : भाजपा समर्थित परिमल नथवाणी तीसरी बार झारखंड से राज्यसभा पहुंचे हैं। इससे पहले वह लगातार दो टर्म झारखंड से राज्यसभा सदस्य रहे। पहली बार वह झारखंड से 10 अप्रैल 2008 से नौ अप्रैल 2014 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।
वह लगातार दूसरी बार झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए। दूसरे टर्म में उनका कार्यकाल 10 अप्रैल से 2014 से नौ अप्रैल 2020 तक रहा। वर्तमान में परिमल आंध्रप्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। उनका कार्यकाल 21 जून को पूरा हो रहा है। भाजपा के अधिसंख्य नेता राज्यसभा चुनाव में आवश्यक आंकड़ा नहीं होने के बाद भी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन के सवाल पर ‘अंतरात्मा की आवाज’ की दुहाई देते रहे।
भाजपा हार्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा लगाए गए आरोप पर कहती रही कि सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक अपनी अंतरात्मा की आवाज पर परिमल नथवाणी को वोट देंगे। दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ गठबंधन नथवाणी की जीत के बाद हार्स ट्रेडिंग की अपनी आशंका को सही बताया।
कांग्रेस के दिग्गज सिपहसालार भी फेल : कांग्रेस के दिग्गज सिपहसालार भले ही अपने प्रत्याशी प्रणव झा को सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रत्याशी घोषित कराने में सफल तो रहे, लेकिन अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने में फेल हो गए।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी बेला प्रसाद, पर्यवेक्षक अजय शर्मा, सांसद डा. सैय्यद नासिर आदि द्वारा कई दिनों से झारखंड में मोर्चा संभालने के बाद भी उनकी रणनीति बुरी तरह फेल हो गई। बीएन चाणक्या होटल में विधायकों को रखे जाने तथा सीएम आवास में डिनर की पॉलिसी भी काम नहीं आई।
विधानसभा में लगे जय श्रीराम के नारे
नथवाणी की जीत के साथ ही झारखंड विधानसभा में जय श्री राम के नारे भी लगे। एनडीए के नेताओं ने इसे बड़ी जीत बताई। दूसरी तरफ, कांग्रेस में मायूसी छा गई। कांग्रेस के नेताओं को समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हुआ।

