पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आखिरकार एनडीए में सीटों के बंटवारे पर सहमति बन गई। शनिवार को गठबंधन के सभी बड़े नेता एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। इस बार बीजेपी ने सीट शेयरिंग की अगुवाई की है।

जानकारी के मुताबिक, बिहार बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को सभी सहयोगी दलों के साथ बैठक के बाद सीटों के फामूर्ले पर मुहर लगा दी है। आज पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर एक बड़ी बैठक है। सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के बड़े नेता और कोर ग्रुप के सदस्य शामिल होंगे। इस बैठक में बीजेपी अपने हिस्से की सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन करेगी। इसके बाद अंतिम मुहर के लिए सूची को केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेजा जाएगा। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चीफ चिराग पासवान ने भी संसदीय दल की बैठक सुबह 11 बजे दिल्ली में बुलाई है। माना जा रहा है कि दोपहर बाद सीट शेयरिंग का ऐलान किया जाएगा।

बीजेपी के बिहार अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार को घोषणा की कि घटक दलों के बीच सीटों पर करीब-करीब निर्णय हो चुका है और इसका आधिकारिक ऐलान शनिवार शाम को दिल्ली या पटना में कर दिया जाएगा। हालांकि, शनिवार को केवल सीटों की संख्या का बेसिक फॉमूर्ला घोषित होगा, जबकि उम्मीदवारों की अंतिम सूची 13 अक्टूबर तक आने की संभावना है। इस घोषणा से पहले बीजेपी ने अपने सभी सहयोगी दलों को राजी करने का काम पूरा कर लिया है, जिससे गठबंधन की एकजुटता का संदेश दिया जा सके।

इधर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद अब महागठबंधन के दलों के बीच पसंद की सीटें और उनकी संख्या को लेकर पड़ी गांठ खोलेंगे। पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक ने उन्हें राजद के उम्मीदवारों का नाम तय करने करने और सहयोगी दलों से बातचीत करने के लिए अधिकृत कर दिया है। कांग्रेस-राजद के बीच भी कुछ विधानसभा सीटों पर विवाद है। राजद की मांग पर कांग्रेस भागलपुर जिले के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से अपना दावा वापस लेने को राजी हो गई है। जाले, बछवाड़ा, रानीगंज, वायसी, बहादुरगंज, सहरसा सहित कुछ अन्य सीटों पर गतिरोध कायम है। इसे सुलझाने के लिए दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत चल रही है। वाम दलों का विवाद भी पूरा नहीं सुलझ पाया है। भाकपा माले की मांग 30 सीटों की है। उसे पिछले चुनाव की तरह 19 सीटों का प्रस्ताव दिया गया है। तेजस्वी चाहते हैं कि माले को कुछ ओर सीटें दी जाए।

भाकपा को पिछले चुनाव की छह के बदले आठ सीटों का प्रस्ताव दिया गया है। माकपा के लिए पहले की तरह चार सीटें रखी गई हैं। राजद का कहना है कि बेहतर प्रदर्शन के बावजूद अगर भाकपा माले को मनमाफिक सीटें नहीं मिल रही है तो खराब प्रदर्शन करने वाली भाकपा-माकपा को अधिक सीटें कैसे दी जा सकती है।

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