
भूमिगत आग, पुराने खनन क्षेत्रों और बारिश से बढ़ी परेशानी; कई इलाकों में घरों पर मंडरा रहा खतरा
धनबाद। कोयलांचल में जमीन धंसने, गोफ बनने और जहरीली गैस के रिसाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनवरी से अब तक धनबाद के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में 45 से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मानसून के दौरान अगस्त और सितंबर में इन घटनाओं की रफ्तार और बढ़ी है। झरिया, कतरास, लोदना, केंदुआडीह और बाघमारा के कई इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच हर समय अनहोनी का डर बना हुआ है।
कोयलांचल की इस समस्या की प्रमुख वजहों में दशकों से चली आ रही भूमिगत कोयला खदानों की आग, पुरानी खदानों के खाली हिस्से और भूगर्भीय अस्थिरता शामिल हैं। बारिश का पानी इन कमजोर हिस्सों तक पहुंचने के बाद कई जगह जमीन की ऊपरी परत का आधार कमजोर कर देता है। इससे भू-धंसान और गोफ बनने का खतरा बढ़ जाता है। कई इलाकों में खनन और ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन को भी जोखिम बढ़ाने वाला कारक माना जा रहा है।
दस दिनों में सामने आईं कई घटनाएं
हाल के दिनों में लगातार सामने आई घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता बढ़ा दी है। 31 अगस्त को लिलोरी पथरा में जमीन धंसने से एक मकान का हिस्सा गोफ में समा गया। 1 सितंबर को गोधर छह नंबर में बने गहरे गोफ की भराई शुरू करनी पड़ी। इसी दौरान कतरास के कैलूडीह में गोफ बनने और गैस रिसाव की सूचना सामने आई।
3 सितंबर को बरारी छह नंबर में जोरदार धमाके के बाद जमीन में दरारें पड़ गईं। दरारों से आग की लपटें और धुआं निकलने की सूचना से लोगों में दहशत फैल गई। 4 सितंबर को कुर्मी डीह में दो बड़े गोफ बनने और गैस रिसाव की सूचना मिली।
छाताबाद में 20 से अधिक मकान प्रभावित
इस साल की सबसे गंभीर घटनाओं में 6 अगस्त को कतरास के छाताबाद में हुआ भू-धंसान शामिल है। इस घटना में 20 से अधिक मकान प्रभावित हुए और कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई। कई घरों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गईं।
स्थानीय लोगों ने खनन क्षेत्र में हो रही भारी ब्लास्टिंग को घटना से जोड़ते हुए इसके खिलाफ चिंता जताई। इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सख्ती दिखाई। 14 अगस्त को धनबाद के उपायुक्त ने वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षा आकलन पूरा होने तक प्रभावित क्षेत्र में ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया। इसके बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय ने न्यू आकाशकिनारी कोलियरी में नियंत्रित डीप-होल ब्लास्टिंग की अनुमति भी वापस ले ली।
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने किया कोयलांचल का दौरा
लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को धनबाद कोयलांचल का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बीसीसीएल की खनन गतिविधियों, झरिया की भूमिगत आग और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पुनर्वासित परिवारों से बातचीत कर प्रभावित लोगों के सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
पुनर्वास की रफ्तार पर भी उठ रहे सवाल
भू-धंसान के साथ वर्षों से चल रहे पुनर्वास अभियान की रफ्तार भी सवालों के घेरे में है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए हर बारिश और हर तेज धमाका चिंता का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग सुरक्षित स्थान पर समय रहते पुनर्वास की है।
बीसीसीएल के तकनीकी एवं संचालन निदेशक संजय कुमार सिंह के अनुसार, भू-धंसान और गैस रिसाव से प्रभावित केंदुआडीह और लोदना जैसे क्षेत्रों में परिवारों को तत्काल सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत 5,940 करोड़ रुपये की राशि से जेआरडीए के साथ मिलकर बेलगड़िया और कर्माटांड़ टाउनशिप में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था तेज की जा रही है।
सवाल सिर्फ अगली घटना का नहीं, सुरक्षा का है
विशेषज्ञों के मुताबिक धनबाद का भू-धंसान संकट किसी एक घटना या केवल बारिश का परिणाम नहीं है। दशकों के भूमिगत खनन, पुरानी खदानों, भूमिगत आग और जमीन के भीतर बने खाली हिस्सों ने कई क्षेत्रों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
ऐसे में सवाल यह है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच मौजूदा सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था लोगों को समय रहते सुरक्षित कर पाएगी या नहीं। कोयलांचल के लोगों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली बार जमीन धंसेगी तो उसकी जद में कौन आएगा।
