
पटना । बिहार के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब पटना से गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और आरा जैसे प्रमुख शहरों के बीच हाई-स्पीड रैपिड रेल दौड़ेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना सहित कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। इस फैसले से न केवल सफर का समय दो-तिहाई कम हो जाएगा, बल्कि बिहार के आर्थिक परिदृश्य में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा।



सरकार ने कुल चार रैपिड रेल कॉरिडोर बनाने पर सहमति दी है। इनमें पटना-गयाजी कॉरिडोर, पटना एयरपोर्ट-बेगूसराय कॉरिडोर, पटना-हाजीपुर-प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर और पटना एयरपोर्ट-आरा कॉरिडोर शामिल हैं। इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के शुरू होने से रोजाना आवागमन करने वाले यात्रियों का काफी समय बचेगा। इस महापरियोजना का खाका खींचने का जिम्मा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को सौंपा गया है। निगम इन चारों रूटों के लिए ‘अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट’ और ‘डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (डीपीआर) तैयार करेगा। इसके लिए कैबिनेट ने 31.59 करोड़ की राशि मंजूर की है। एनसीआरटीसी यह आकलन करेगा कि किन रूटों पर कौन सा सिस्टम सबसे किफायती होगा और पटरियां अंडरग्राउंड होंगी या एलिवेटेड।
क्या है रैपिड रेल और क्यों है खास रैपिड रेल एक सेमी हाई-स्पीड यात्री ट्रेन सेवा है। इसे दो बड़े शहरों के बीच की दूरी को बहुत कम समय में तय करने के लिए बनाया जाता है। इसका सफल उदाहरण दिल्ली-मेरठ ‘नमो भारत’ ट्रेन है, जहां 82 किमी का सफर मात्र 55 मिनट में पूरा होता है। बिहार में भी इसी तर्ज पर शहरों को आपस में जोड़ा जाएगा।
पटना एम्स का बड़ा विस्तार: दानापुर के भुसौला मौजा में 26.76 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए 348.89 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इससे अस्पताल में बेड और सुविधाएं बढ़ेंगी।
तीन जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय: मधुबनी (लखनौर), मुंगेर (सदर) और मुजफ्फरपुर (मुशहरी) में नए स्कूल खुलेंगे। सरकार ने 5-5 एकड़ जमीन महज 1 रुपये के टोकन मूल्य पर लीज पर दी गई है।
ग्रेटर पटना क्षेत्र का बनेगा आधार रैपिड रेल प्रोजेक्ट केवल एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं है, बल्कि यह बिहार के सुनियोजित शहरी विकास की नींव है। दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर अब ’ग्रेटर पटना’ का सपना साकार होगा। इससे सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होंगे, जिससे पटना पर आबादी का दबाव कम होगा। यह प्रणाली छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को सुरक्षित और तीव्र कनेक्टिविटी देगी, जिससे राज्य की जीडीपी में भी उछाल आने की उम्मीद है।

