
नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन के तहत दिल्ली के तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के प्रत्याशियों के समर्थन में शनिवार को अशोक विहार के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी की जनसभा में कई बाते गठबंधन के सहयोगी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ की दूरी की कहानी वयां कर गई।
मंच पर लगे पोस्टर से केजरीवाल की तस्वीर नदारद थी। इतना ही नहीं पूरे आयोजन स्थल के आसपास कांग्रेस के इस सम्मेलन से जुड़े किसी भी पोस्टर पर केजरीवाल की फोटो नहीं थी। न ही मंच से केजरीवाल की बात की गई। हां! मंच पर आप पार्टी के मंत्री इमरान हुसैन के साथ स्थानीय नेताओं में अखिलेश पति त्रिपाठी, वंदना सिंह, राजेश गुप्ता आदि मौजूद थे।
आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग राहुल गांधी को सुनने के लिए पहुंचे थे। लंबे इंतजार के बाद वो पौने आठ बजे मंच पर पहुंचे और जयप्रकाश अग्रवाल, कन्हैया कुमार और उदित राज के साथ गुफ्तगू करने के बाद माइक संभाला तो फिर लगातार चालीस मिनट तक नानस्टॉप बोलते रहे।
इस दौरान भीड़ के ताली बजाने और राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने का सिलसिला जारी रहा। उन्होंने मंच से मीडिया को जमकर धोया और उस पर उद्योगपतियों और मोदी का पिछलग्गू होने का आरोप भी लगाया। इस बात पर भीड़ ने सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया व्यक्त की।
राहुल गांधी ने मैदान में सुरक्षा में खड़े पुलिसकमिंर्यों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2004 के बाद से जो आप लोगों की पेंशन छीन ली गई है, उसे हमारी सरकार आते ही दिलाएगी। इस बात पर तो ऐसा नारा लगा की माइक की आवाज भी धीमी पड़ गई।
उन्होंने हर पढ़े लिखे युवा को गारंटी नौकरी देने, महिलाओं को हर साल एक लाख रुपए देने का भरोसा दिया। उन्होंने गठबंधन के तहत तीन पर कोंग्रेस और चार सीट पर आप पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की लेकिन एक बार भी आप पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया।
