
नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए दुनियाभर के शीर्ष नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा को लेकर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) और भारतीय सुरक्षा एवं आतंकवाद-रोधी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
पुतिन के जमीनी सफर के लिए विशेष रूप से तैयार ‘ऑरस सीनेट’ (Aurus Senat) बख्तरबंद लिमोजीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस कार को अक्सर ‘चलता-फिरता बंकर’ कहा जाता है। इसकी सुरक्षा क्षमता को देखते हुए इसे राष्ट्रपति की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा परतों में शामिल किया जाता है।
गोलियों और धमाकों से सुरक्षा के लिए खास डिजाइन
ऑरस सीनेट को बेहद मजबूत सुरक्षा मानकों के साथ तैयार किया गया है। इसमें बख्तरबंद बॉडी, विशेष सुरक्षा वाले शीशे और रन-फ्लैट टायर जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे टायर क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी वाहन को आगे बढ़ाया जा सकता है। आपात स्थिति के लिए इसमें ऑक्सीजन की अलग व्यवस्था भी बताई जाती है।
इस काफिले में शामिल वाहनों और सुरक्षा टीमों का उद्देश्य राष्ट्रपति को संभावित गोलीबारी, विस्फोट और अन्य सुरक्षा खतरों से बचाना होता है। पुतिन की आधिकारिक कार को विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत मॉस्को से भी लाया जाता है।
हवा में भी ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ का सुरक्षा कवच
पुतिन हवाई यात्रा के दौरान विशेष रूप से मॉडिफाई किए गए इल्यूशिन IL-96-300PU विमान का इस्तेमाल करते हैं। इसे अक्सर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है। विमान में सुरक्षित संचार और कमांड सिस्टम समेत राष्ट्रपति की यात्रा के लिए जरूरी विशेष व्यवस्थाएं होती हैं।
राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान रूसी सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही यात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों की सुरक्षा का आकलन करती हैं। रूसी प्रतिनिधिमंडल अपने लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कड़ा नियंत्रण रखता है।
दिल्ली में कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा
ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों में बांटा गया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी के लिए आधुनिक कैमरों और ड्रोन-रोधी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां हवाई और जमीनी दोनों स्तरों पर लगातार निगरानी रख रही हैं।
अंदरूनी घेरे में रूसी सुरक्षा अधिकारी
पुतिन की सुरक्षा के सबसे अंदरूनी घेरे में रूसी प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस (SBP) के विशेष अधिकारी रहते हैं। इन्हें FSO की एडवांस्ड टीमें सहयोग देती हैं। ये टीमें उन सभी स्थानों की सुरक्षा जांच करती हैं, जहां राष्ट्रपति का कार्यक्रम निर्धारित होता है। इस दौरान रूसी दल अपने वाहन, संचार और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को भी अपने नियंत्रण में रखता है।
इस तरह पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हवा से लेकर जमीन तक बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें रूस और भारत की सुरक्षा एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

