
Su-57, ब्रह्मोस-NG, S-400 और परमाणु ऊर्जा समेत कई मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार तड़के विशेष विमान से नई दिल्ली पहुंचे। पालम एयरफोर्स स्टेशन पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के बाहर आयोजित किसी BRICS सम्मेलन में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत भागीदारी है। सम्मेलन के औपचारिक कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की बातचीत में रणनीतिक साझेदारी, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
रक्षा क्षेत्र में बड़े समझौतों पर नजर
मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दा रह सकता है। भारत में रूसी Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट के संभावित संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को ‘सुपर सुखोई’ मानक के अनुरूप अपग्रेड करने, S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की शेष खेप की आपूर्ति और हल्की एवं तेज ब्रह्मोस-NG मिसाइल के संयुक्त विकास पर भी बातचीत हो सकती है।
चार प्रमुख मुद्दे
1. रक्षा सहयोग: S-400 की आपूर्ति, Su-30MKI का अपग्रेड, Su-57 और ब्रह्मोस-NG से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा।
2. परमाणु ऊर्जा: कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के आगामी चरणों और भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) की संभावनाओं पर बातचीत।
3. रुपये-रूबल व्यापार: दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर।
4. कनेक्टिविटी: इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे को गति देने पर चर्चा संभव है।
पुतिन की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम
रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर राजधानी में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुतिन के काफिले और उनकी बख्तरबंद ‘ऑरस सीनेट’ लिमोजिन को पहले ही भारत लाया जा चुका है। नई दिल्ली स्थित आईटीसी मौर्या में उनके ठहरने के दौरान आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (FSO) के पास रहेगी, जबकि बाहरी सुरक्षा भारतीय सुरक्षा एजेंसियां संभालेंगी।
मोदी-पुतिन बैठक को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में होने वाली चर्चाओं और संभावित समझौतों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।
