
पटना। बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को पांच अहम बिंदुओं पर विशेष फोकस करने का निर्देश दिया है। आर्म्स एक्ट, सांप्रदायिक तनाव, पुलिस पर हमला, हर्ष फायरिंग और पाक्सो-हत्या जैसे गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई और आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का टास्क दिया गया है। साथ ही इन मामलों के स्पीडी ट्रायल पर भी जोर रहेगा।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि इन पांच श्रेणियों के मामलों की नियमित समीक्षा करें और लंबित कांडों के निष्पादन में तेजी लाएं। जिलों को ऐसे गंभीर मामलों की अलग से पहचान कर स्पीडी ट्रायल के लिए सूची तैयार करने को भी कहा गया है।
निर्देश में बालू, शराब और जमीन माफिया के खिलाफ अभियान तेज करने पर भी जोर दिया गया है। अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती के लिए जिलों को लगातार सूची अपडेट करने और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी बढ़ाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस वर्ष मई तक चार लाख से अधिक लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं 33 हजार से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हत्या के मामलों में दो हजार से अधिक और एससी-एसटी एक्ट के मामलों में 1500 से ज्यादा गिरफ्तारियां शामिल हैं।
हर्ष फायरिंग और पुलिस पर हमले पर सख्ती : पुलिस ने सांप्रदायिक हिंसा के 57 मामलों, पुलिस पर हमले के 1065 मामलों और हर्ष फायरिंग के 20 मामलों में कार्रवाई की है।
मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अपराधों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
पुलिस मुख्यालय ने बालू, शराब और जमीन माफिया समेत करीब 1500 आदतन अपराधियों को संपत्ति जब्ती के लिए चिह्नित किया है। इनमें लगभग 450 मामलों का प्रस्ताव अदालत भेजा जा चुका है, जबकि चार मामलों में अदालत संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दे चुकी है। बीएनएसएस की धारा-107 के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
