
नयी दिल्ली: बड़ी संख्या में चेक बाउंस के मामलों के लंबित होने पर ‘‘गंभीर चिंता’’ व्यक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि यदि पक्ष समझौता करने के इच्छुक हैं तो अदालतों को परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत समझौता योग्य अपराधों के निपटान को प्रोत्साहित करना चाहिए।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने चेक बाउंस मामले में पी कुमारसामी नाम के एक व्यक्ति की सजा को यह देखते हुए रद्द कर दिया कि दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया है और शिकायतकर्ता को 5.25 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
