नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए। वह शुक्रवार को दोपहर 12 बजे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। दिल्ली पहुंचने के बाद नीतीश ने मीडिया से कहा कि वह राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेने के लिए यहां आए हैं और अब यहीं रहकर काम करेंगे। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वह बिहार की जिम्मेदारी छोड़ रहे हैं। वह लंबे समय तक बिहार में रहे और अब दिल्ली में रहकर नई भूमिका निभाएंगे।15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी हो रही है। नीतीश के साथ पटना से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एवं बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी भी दिल्ली आए हैं। शुक्रवार को राज्यसभा सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश पटना लौट जाएंगे। दिल्ली में भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता से उनकी मुलाकात का समय अभी तक निर्धारित नहीं है।बिहार में नई सरकार के स्वरूप के बारे में विजय चौधरी ने कहा कि नई सरकार भले ही नए नेतृत्व में बनने जा रही है, लेकिन प्रशासनिक और नीतिगत दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से जिस माडल पर सरकार चल रही है, उसी के आधार पर आगे भी काम होगा।नीतीश कुमार पहले ही विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। नियमों के तहत उन्हें 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी, जिसके तहत उन्होंने 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर प्रस्थान करना है।उनके इस कदम के बाद राज्य में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही एनडीए के भीतर नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। बिहार में सत्ता का नेतृत्व भाजपा के हाथों में जाने के बावजूद गठबंधन की संरचना पहले जैसी ही रहने के संकेत हैं।

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