
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों का सीधा असर स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, उद्योग, बिजली और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। सबसे बड़ी राहत उन मरीजों को मिली है जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करा पाते थे। वहीं रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी कई अहम निर्णय लिए गए। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर चार लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 2.50 लाख रुपये थी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से अधिक संख्या में जरूरतमंद मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।बिहार बाल विकास सेवा नियमावली में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के कई पद लंबे समय से खाली थे क्योंकि पदोन्नति के लिए पर्याप्त महिला पर्यवेक्षिकाएं उपलब्ध नहीं थीं। अब एक बार के लिए इन पदों को बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया गया है। इससे आईसीडीएस योजनाओं के संचालन में तेजी आने की उम्मीद है।सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन : राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 164.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। योजना के तहत व्यक्तिगत उद्यमियों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा। समूह आधारित इकाइयों को भी पूंजीगत अनुदान का लाभ दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार को बढ़ावा देना है।बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान: ऊर्जा विभाग से जुड़े एक अहम फैसले में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के अंतर्गत द्वि-स्तरीय उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के गठन को मंजूरी दी गई है। इसके लिए मुख्य अभियंता और विद्युत अधीक्षण अभियंता के नए पद भी सृजित किए जाएंगे। इससे बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी : मंत्रिपरिषद ने मधुबनी स्थित मेसर्स लीप एग्री लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली के तहत वित्तीय प्रोत्साहन की स्वीकृति दी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।भोजपुर में बनेगा आधुनिक जलीय कृषि पार्क : कैबिनेट ने भोजपुर जिले के बाणासुर मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में 31.20 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत जलीय कृषि पार्क की स्थापना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बनने वाली इस परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी होगी। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र को नई दिशा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
