नई दिल्ली । लोकसभा में इस बार मॉनसून सत्र में सदस्यों को अपनी अटेंडेंस लगाने के लिए हाउस के बाहर लॉबी में लाइन में नहीं लगना पड़ेगा बल्कि इसके लिए वह सदन के अंदर ही अपनी सीट के सामने रखे मल्टी मीडिया डिवाइस से हाजिरी लगा सकेंगे। इस नई डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था के तहत सदस्यों के पास अटेंडेंस लगाने के लिए तीन विकल्प रहेंगे। इनमें बायोमेट्रिक, पिन नंबर और कार्ड सिस्टम होगा। इसमें से वह चाहे किसी एक सिस्टम से अपने सदन में आने की उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। ट्रायल की कामयाबी मिलने के बाद इस बार मॉनसून सत्र से सदस्यों को इसकी सुविधा दी जानी शुरू की जा रही है।

नए सिस्टम से बचेगा टाइम : आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सदस्यों का अपनी सीट पर बैठकर ही अटेंडेंस लगाने के नए डिजिटल सिस्टम से ना केवल लॉबी में सदस्यों को अटेंडेंस लगाने में लगने वाला वक्त बचेगा, बल्कि कई बार एक साथ कई सदस्यों के आने से लगने वाली लाइन से भी मुक्ति मिलेगी।

सूत्रों का कहना है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस नई डिजिटल व्यवस्था को शुरू करने के इच्छुक हैं। इसके तहत कुछ समय के लिए लॉबी में रजिस्टर पर अटेंडेंस लगाने वाली व्यवस्था कुछ समय तक जारी रहेगा, ताकि सांसदों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नए डिजिटल सिस्टम को जानने का समय मिल सके। सूत्रों ने बताया कि इस नई व्यवस्था के बारे में सदस्यों को जानकारी दे दी गई है। जिसमें कहा गया है कि वह अपनी अटेंडेंस सदन के अंदर अपनी सीट पर ही लगा सकेंगे।

मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा : इस बार संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। लोकसभा स्पीकर ओम प्रकाश बिरला ने पिछले साल संसद को कागज रहित बनाने के प्रयासों के तहत सदस्यों को लॉबी में एक इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट पर डिजिटल पेन का उपयोग करके सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का विकल्प दिया था। इस बार सदस्यों को उन्हीं की सीट पर अटेंडेंस लगाने की सुविधा दी जा रही है।

संसद भाषणी ऐप का ट्रायल : इसके अलावा लोकसभा में अभी 18 अलग-अलग भाषाओं में अपनी सहूलियत के हिसाब से सदन की कार्रवाई को सुना जा सकता है। इसमें सिंधी समेत चार और भाषाओं को जोड़ा जा रहा है। इसी तरह सदस्यों को मिलने वाला एजेंडा भी उन्हीं की भाषा में दिए जाने पर काम किया जा रहा है। इसके तहत आठ से 12 भाषाओं में यह एजेंडा इस बार से उनकी स्क्रीन पर पीडीएफ के रूप में देना शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए एआई का इस्तेमाल करते हुए अलग से एक संसद भाषणी ऐप बनाया गया है। सदन की डिबेट और अन्य कार्रवाई को भी लोकसभा की रिपोर्टिंग ब्रांच के साथ-साथ एआई के माध्यम से ट्रांसलेट करके लिखने का ट्रायल भी इस सत्र में किया जाएगा।

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