
पटना। बिहार की जीविका दीदियां अपनी मेहनत और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए ड्रेस तैयार करने के काम से हजारों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और नियमित आय का अवसर मिला है।



ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में जीविका-बिहार रूरल लाइवलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) के सहयोग से कुछ वर्ष पहले जानकी जीविका महिला स्टिचिंग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (जानकी पीसी) का गठन किया गया था। कंपनी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में करीब 50 हजार जीविका दीदियां बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई के कार्य से जुड़ी हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जीविका दीदियां अब तक 90 लाख से अधिक ड्रेस तैयार कर चुकी हैं। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में ही ड्रेस सिलाई के माध्यम से करीब 126 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया है।
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को उनके गांव और घर के आसपास ही रोजगार का अवसर मिला है। सरकारी ऑर्डर का लाभ सीधे स्थानीय महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
सिलाई के संगठित काम ने महिलाओं में केवल आय का साधन ही नहीं बढ़ाया, बल्कि उनके भीतर व्यावसायिक समझ, वित्तीय साक्षरता और नेतृत्व क्षमता का भी विकास किया है। साथ ही, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक ड्रेस उपलब्ध कराने में भी जीविका दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

