पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी के साथ आवास से निकलकर लोक भवन पहुंचे और औपचारिक रूप से पद छोड़ दिया।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बन सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री पद के लिए अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सम्राट चौधरी को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। भाजपा विधायक दल की बैठक भी जल्द होने वाली है।नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही बिहार में उनके लंबे राजनीतिक दौर के समाप्त होने की चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने लगभग दो दशकों तक राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई और अपनी अलग पहचान बनाई।नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों से अधिक पुराना है। उन्होंने 1985 में जनता दल से अपने करियर की शुरुआत की। 1994 में उन्होंने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ बगावत करते हुए जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में नई राजनीतिक राह चुनी, जो आगे चलकर समता पार्टी के रूप में उभरी।मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2000 में रहा, लेकिन बहुमत के अभाव में उनकी सरकार मात्र सात दिन में गिर गई। इसके बाद 2005 में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लालू प्रसाद के 15 वर्षों के शासन का अंत किया और बिहार में नए राजनीतिक युग की शुरुआत की।हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार सक्रिय रूप से राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभा सकते हैं। अब उनके इस्तीफे के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।

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