
पटना। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राजद के लोक भवन मार्च पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह मार्च जनसमर्थन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की राजनीति को बचाने की असफल प्रयास साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि लोक भवन मार्च के नाम पर राजद ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास किया, लेकिन जमीन पर न तो अपेक्षित जनसमर्थन दिखाई दिया और न ही कार्यकर्ताओं में वह उत्साह नजर आया, जिसका दावा राजद लगातार करता रहा है।
उन्होंने कहा कि राजद के साथ न छात्र खड़े हुए, न आम जनता और न ही राजद के कार्यकर्ताओं में कोई खास उत्साह दिखा। तेजस्वी यादव की राजनीति अब जनता के वास्तविक मुद्दों से कटकर केवल विरोध, आरोप और कैमरे के सामने प्रदर्शन तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि बिहार के युवा रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर अवसर और विकसित बिहार चाहते हैं। जनता यह जानना चाहती है कि बिहार के विकास में उनका ठोस विजन क्या है, लेकिन तेजस्वी यादव के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
बकौल सरावगी, केवल मार्च निकालने और सरकार के खिलाफ नारे लगाने से बिहार की जनता का विश्वास वापस नहीं पाया जा सकता। जनता अब काम और परिणाम के आधार पर नेताओं का मूल्यांकन करती है। उन्होंने तेजस्वी की मार्च को फ्लॉप शो करार दिया।
दूसरी ओर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च को केवल चेहरा चमकाने का राजनीतिक हथकंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव का राजनीतिक करियर दांव पर लगा है। तेजी से खिसकते जनाधार से पूरा राजद खेमा घबराया हुआ है।
बकौल कुशवाहा, बिहार की जनता के साथ-साथ राजद के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी तेजस्वी यादव की छवि एक पार्ट-टाइम और नॉन-सीरियस नेता के रूप में बन चुकी है। इसी छवि को पाटने के विफल प्रयास के तौर पर राजभवन मार्च का आयोजन किया गया, लेकिन इससे राजद को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है।
