नयी दिल्ली:  दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने संबंधी अधीनस्थ न्यायालय का आदेश तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब तक कि अदालत कथित आबकारी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती।

ईडी ने न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपनी याचिका रखी। पीठ ने कहा कि मामला 10 से 15 मिनट में उनके पास आ जाएगा और उसके बाद मामले पर सुनवाई होगी।

दिल्ली शराब नीति केस में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 20 जून को अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी। ED ने इसका विरोध करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की वेकेशनल बेंच में याचिका लगाई है।

ED की ओर से ASG एसवी राजू, केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और विक्रम चौधरी दलीलें रख रहे हैं। जस्टिस सुधीर जैन और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच सुनवाई कर रही है।

ED के वकील एसवी राजू ने कहा कि हमें दलीलें रखने का मौका नहीं मिला। इस पर केजरीवाल के वकील बोले- आपने कल 7 घंटे अपनी बातें रखीं। शालीनता से कुछ बातें स्वीकार करनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा- ED की याचिका पर सुनवाई होने तक ट्रायल कोर्ट के आदेश को प्रभावी नहीं माना जाएगा। यानी हाईकोर्ट का जब तक फैसला नहीं आ जाता तब तक केजरीवाल जेल में ही रहेंगे।

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