नई दिल्ली । जस्टिस यशवंत वर्मा के घर आग लगने और जला हुआ कैश मिलने पर हंगामा जारी है। सुप्रीम कोर्ट के उच्च स्तरीय न्यायिक पैनल ने इस मामले की जांच रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए हैं। पैनल की रिपोर्ट में शराब की बोतलों का एंगल भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस स्टोररूम में आग लगी वहां शराब की बोतलें भी रखी हुई थीं। इसी के कारण आग और भड़की। एक फायरमैन ने बताया कि आग बुझाते समय शराब की बोतलों के टकराने की आवाजें आ रही थीं। इसी से आग और बढ़ गई, जिस समय ये घटना हुई जस्टिस वर्मा उस समय शहर से बाहर थे।

जस्टिस वर्मा के घर कैश कांड मामले की जांच को लेकर 22 मार्च को तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने हाईलेवल कमेटी बनाई थी। इस कमेटी कमेटी ने 55 लोगों से पूछताछ की। इनमें जस्टिस वर्मा भी शामिल थे। पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। कमेटी की रिपोर्ट में टीओआई की 21 मार्च की खबर का भी जिक्र है, जिसमें इस मामले का खुलासा किया गया था। न्यायिक पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर 14 मार्च की रात को आग लगी थी।

इस आग लगने के बाद भारी मात्रा में बेहिसाब जला हुआ कैश मिला था। ये आग स्टोररूम में लगी थी। स्टोर रूम में शराब की बोतलें रखी थीं। शराब की बोतलों के कारण आग और तेजी से फैल गई। एक फायरमैन ने बताया कि आग बुझाते समय, बाईं ओर शराब की बोतलें टकराने की आवाज आ रही थी। इससे आग की तीव्रता दाईं ओर बढ़ गई। जब दाईं ओर आग बुझा रहे थे, तो वहां रखा सामान गीला होकर गिर गया। फर्श पर करेंसी नोट भी दिख रहे थे।

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्विच बॉक्स के पास शराब का कैबिनेट था। जांच टीम ने मौके पर जाकर इसकी पड़ताल की है। कमरे में बहुत सारा कैश भी रखा हुआ था। आग लगने से कैश भी जल गया। जब बंगले के स्टोररूम में आग लगी, तो जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे। घर में उनकी बेटी और प्राइवेट सेक्रेटरी भी थे, लेकिन उनके पास कमरे की चाबी नहीं थी। सुरक्षा गार्डों को ताला तोड़ना पड़ा। इसके बाद फायरफाइटर्स और पुलिस अंदर पहुंच सके।

पैनल ने उठाए जस्टिस वर्मा के दावे पर सवाल : पैनल ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि इस मामले की और जांच होनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि कमरे में इतना कैश कहां से आया। इस घटना से कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने अपनी सफाई में कहा था कि उनके घर के स्टोररूम में किसी ने पैसे रख दिए होंगे। उन्होंने कहा था कि स्टोररूम में कोई भी आ जा सकता था। लेकिन कमेटी ने उनकी इस दलील को नहीं माना।

64 पेज की रिपोर्ट में उठाए कई मुद्दे : कमेटी ने अपनी 64 पेज की रिपोर्ट में कहा कि स्टोररूम पर जस्टिस वर्मा का ही नियंत्रण था। स्टोररूम में आने-जाने की इजाजत भी वही देते थे। अब ऐसा लग रहा है कि संसद के मानसून सत्र में जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। कमेटी ने कहा कि जस्टिस वर्मा का तुगलक क्रिसेंट बंगले पर पूरा नियंत्रण था। इसलिए उनकी साजिश और आगजनी की दलील को खारिज किया जाता है।

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