
रांची। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के विरोध में आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की सोमवार को राज्य सरकार की मंत्रिमंडलीय समिति के साथ होने वाली वार्ता बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
राजकीय अतिथिशाला में अपराह्न दो बजे आयोजित इस बैठक में उन सभी तकनीकी और विधिक बिंदुओं पर सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिन पर पिछली वार्ता बेनतीजा रही थी। इस बार की वार्ता की सबसे खास बात यह है कि सरकार ने छात्रों को अपने विधिक सलाहकारों (लीगल एडवाइजर्स) के साथ बैठक में शामिल होने की अनुमति दी है।
पूर्व में छात्रों ने पूर्व महाधिवक्ता अजित कुमार का नाम दिया था, जिस पर मंत्रियों की समिति असहमत थी।बैठक के दौरान मंत्रियों की कमेटी छात्रों के कानूनी सलाहकारों से यह समझने का प्रयास करेगी कि जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा को रद करने में कोई कानूनी अड़चन तो नहीं है।
गौरतलब है कि सरकार का रुख रहा है कि सीजीएल परीक्षा अदालत के निर्देशों के तहत आयोजित की गई थी और इसके तहत नियुक्तियां भी पूरी हो चुकी हैं।
यदि कानूनी रूप से रास्ता साफ होता है, तो सरकार इस परीक्षा को रद करने पर विचार कर सकती है।
परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद करने की मांग पर भी रास्ते निकलने के आसार हैं। मुख्यमंत्री पहले ही इस एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं की जांच की बात कह चुके हैं। वार्ता में इस बात पर सहमति बन सकती है कि यदि जांच में किसी भी तरह की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित सभी परीक्षाएं रद कर दी जाएंगी। यदि आज की वार्ता में विधिक बिंदुओं पर सहमति बन जाती है, तो राज्य में पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के शांत होने की पूरी संभावना है।

