
रांची। झारखंड वीरों और शहीदों की भूमि रही है। पूर्वजों की तपस्या, त्याग और बलिदान का परिणाम है कि आदिवासियों को अलग पहचान मिल रही है। वह रविवार को पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो प्रखंड स्थित सेरेंगसिया में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 1837 में हुये विद्रोह के महानायकों की याद एवं सम्मान में आयोजित शहीद दिवस समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हम उन शहीदों को सम्मान एवं नमन करते हैं, जिनकी बदौलत देश के विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज बुलंद करने की हम सभी को ताकत मिली है। हमें आदिवासी होने का गर्व है। इस दौरान झारखंड की उपेक्षा पर श्री सोरेन केंद्र सरकार पर जम कर भड़के और कहा, झारखंड अपना हक लड़ कर लेना जानता है और लेगा भी। समारोह में सीएम के साथ विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं।
सेरेंगसिया के शहीदों को नमन सह परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम में सीएम ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के बजट में झारखंड के लिए कुछ नहीं है। आदिवासियों के लिए कुछ नहीं है। सालों से चल रही योजनाओं का नाम बदलकर हमारे बीच चला रहे हैं। उन्होंने कहा, आज भी देश में सामंती मानसिकता वाले लोगों की कमी नहीं है, हमें उनसे भी निपटना है। झारखंड की खनिज संपदा से पूरा देश चमक रहा है, देश का खजाना भर रहा है, लेकिन आज भी झारखंड देश का सबसे पिछड़ा राज्य है। इसकी वजह अलग राज्य बनने के बाद की सरकारों ने राज्य के विकास पर ध्यान नहीं दिया। जब से हमारी सरकार है, झारखंड को आगे ले जाने का प्रयास निरंतर जारी है।
शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम हेमंत ने कहा कि हमने लड़ाई लड़कर झारखंड लिया है और आगे भी लड़ाई लड़कर अपना हक लेंगे, जो अभी भी जारी है। जब देश ने आजादी का सपना भी नहीं देखा था, तब हमारे पूर्वजों गरीब आदिवासी समाज के लोगों ने ताकतवर अंग्रेजों से लड़ाई लड़कर अपनी ताकत साबित की थी। हमें आदिवासी होने पर गर्व है। यहां सालों भर शहादत दिवस मनाने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शहीदों और उनके आश्रितों को सम्मान के साथ हक अधिकार दे रही है।
सीएम ने कहा, हम अपने आदिवासियों से आग्रह करते हैं कि वे अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ा-लिखा कर उनका भविष्य बनायें। आदिवासियों को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गरीबों को सिर्फ मदद की ही नहीं जरूरत, बल्कि उन्हें उनके पैरों पर खड़ा करना है। हमारी सरकार ने हर गरीब परिवार को ऐसी ताकत दी है कि उन्हें सरकार से मिलने वाले अनाज या किसी अन्य सामान को बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समस्याओं के समाधान के लिए आपके दरवाजे पर जिला और ब्लॉक प्रशासन की टीम पहुंचेगी। आपको ब्लॉक और जिला कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
