रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी को रिमांड पर लिए गए बिचौलिया बुद्धेश्वर भगत ने अभ्यर्थियों से पैसे की वसूली और परीक्षा में कथित सेटिंग को लेकर कई अहम जानकारी दी है। उसके कथित बयान के अनुसार, परीक्षा में प्रारंभिक स्तर से लेकर अंतिम चयन तक के लिए अलग-अलग रकम तय की गई थी।

बुद्धेश्वर के अनुसार, सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के अंतिम चयन के लिए एक करोड़ रुपये, जबकि एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 80 लाख रुपये का कथित सौदा तय था। प्रारंभिक परीक्षा में पास कराने के लिए 10 लाख रुपये मांगे जाते थे। मुख्य परीक्षा तक तय रकम की करीब 50 प्रतिशत राशि देने की बात कही गई थी।

11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये लेने का दावा

बुद्धेश्वर ने सीआईडी को बताया कि प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने के बाद अभ्यर्थी अंतिम चयन के लिए भी पैसे देने को तैयार रहते थे। उसके मुताबिक, इसी वजह से प्रारंभिक परीक्षा से पहले ही इच्छुक अभ्यर्थियों से रकम ली जाती थी। कथित तौर पर लेनदेन नकद में किया जाना तय था। अभ्यर्थी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है।

बुद्धेश्वर के कथित बयान के अनुसार, उसने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में पास कराने के नाम पर 11 अभ्यर्थियों से कुल 1.10 करोड़ रुपये लिए थे। उसने बताया कि कुल 24 अभ्यर्थियों ने उससे संपर्क किया था, लेकिन 11 अभ्यर्थियों ने ही पैसे दिए।

एनएचएम में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी से शुरू हुआ संपर्क

बुद्धेश्वर भगत मूल रूप से लोहरदगा के बेजवाली का रहने वाला बताया गया है। वर्ष 2008 में वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के नामकुम स्थित कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में नियुक्त हुआ था। नौकरी के साथ वह जमीन के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था।

सीआईडी के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान एनएचएम कार्यालय में उसकी मुलाकात जेपीएससी परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से हुई। उस समय अभय तिवारी टीएंडएम कंस्लटेंसी सर्विसेज से जुड़ा था और एनएचएम में आउटसोर्सिंग का टेंडर लेने के सिलसिले में कार्यालय आता-जाता था।

बुद्धेश्वर के मुताबिक, इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई। जनवरी 2026 में 14वीं जेपीएससी परीक्षा की घोषणा के बाद अभय तिवारी ने उससे संपर्क कर कथित तौर पर कहा कि परीक्षा में सेटिंग हो रही है और यदि कोई अभ्यर्थी हो तो उसे बताया जाए। उसने अभ्यर्थी का परिणाम पक्का कराने का भरोसा भी दिलाया था।

फ्लैट में उत्तर लिखवाने और अंक बढ़वाने का भी आरोप

सीआईडी को दिए गए अभय तिवारी के कथित बयान में रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर अभ्यर्थियों के उत्तर लिखवाने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ एजेंट दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों की ओर से उत्तर लिखवाते थे।

बयान के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों के उत्तर अपेक्षाकृत बेहतर होते थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किया जाता था। अभय के कथित बयान में एसीएफ और एफआरओ परीक्षा में अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा के उत्तर लिखवाने और अंक बढ़वाने के लिए करीब 40 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है।

सीडीपीओ परीक्षा में भी कथित लेनदेन का दावा

सीआईडी के सामने दिए गए कथित बयान में सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल के माध्यम से अभ्यर्थी उपलब्ध कराने और प्रति अभ्यर्थी करीब 10 लाख रुपये का रेट होने की बात कही गई है।

अभय तिवारी के कथित बयान में टीडीपीएल से जुड़े रामवीर सिंह और सतपाल सिंह के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के आवास पर आने-जाने का भी उल्लेख है। बयान में दावा किया गया है कि इन्हीं लोगों से अभय ने कथित तौर पर सुना था कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने तीन अभ्यर्थियों की मदद कराई थी। हालांकि, अभय ने उन अभ्यर्थियों के नाम की जानकारी होने से इनकार किया है।

सीआईडी इन सभी दावों और बयानों का सत्यापन कर रही है। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version