तेहरान । इजरायल और ईरान की जंग कभी दो देशों से आगे बढ़कर बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। सभी की नजरें अमेरिका पर टिकी हैं, जहां राष्ट्रपति ट्रंप अगले दो सप्ताह में युद्ध में शामिल होने को लेकर फैसला कर सकते हैं। ईरान भी झुकने को तैयार नजर नहीं आ रहा है और उसने कहा है कि अगर अमेरिका युद्ध में शामिल हुआ तो वह उसके ठिकानों पर हमला करेगा। ऐसे में यह युद्ध कभी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है, जिसकी जद में पूरा मध्य पूर्व आ सकता है या फिर यह बाहर तक भी जा सकता है। खाड़ी में युद्ध अगर फैलता है तो इसका असर भारत पर बहुत ज्यादा पड़ने वाला है।

वरिष्ठ पत्रकार स्टैनली जॉनी ने लिखा इस क्षेत्र में लगभग 90 भारतीय रहते और काम करते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में रहने वाले भारतीय बड़ी मात्रा में धन भारत भेजते हैं। इसे ऐसे समझा जाता है कि दुनिया से भारत भेजे जाने वाल कुल धन का आधा हिस्सा जीसीसी देशों में रहने वाले भारतीयों से आता है। साल 2023 में 118.7 अरब डॉलर था। ऐसे में अगर संघर्ष छिड़ता है तो यहां रहने वाले भारतीयों को वापस लाना एक बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से लगभग 50 फीसदी जीसीसी और इराक से आ रहा है। प्राकृतिक गैस के लिए भारत की इस क्षेत्र पर निर्भरता और भी अधिक है। अगर खाड़ी देश युद्ध में फंसते हैं, तो आपूर्ति मार्ग पर असर पड़ सकता है। ईरान जवाबी कार्रवाई के रूप में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल का 20 प्रतिशत भाग गुजरता है। इसके साथ ही वह ओमान की खाड़ी और अरब सागर के मार्गों पर भी हमले शुरू कर सकता है, जबकि हूती लाल सागर में फिर से जहाजों को निशाना बना सकते हैं। इसके तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

ईरान मध्य एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है। ईरान उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। भारत ने चाबहार में लाखों डॉलर का निवेश किया है, जिसकी वास्तविक क्षमता अभी तक सामने नहीं आ पाई है। इस बंदरगाह के जरिए वह मध्य पूर्व में प्रवेश की उम्मीद कर रहा है। ऐसे में ईरान में स्थिरता भारत के आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

इस बीच भारत ने ईरान और इजरायल में रहने वाले भारतीयों को निकालना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि इजरायल छोड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों को इजरायल की जमीनी सीमाओं के माध्यम से घर लौटने में सहायता की जाएगी। इजरायल विभिन्न उद्योगों, कृषि परियोजनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में लगभग 36000 भारतीय काम कर रहे हैं। भारत की घोषणा के एक दिन पहले ही इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा था कि इजरायल सरकार तेल अवीव में भारतीय दूतावास के साथ समन्यव कर रही है, ताकि उन भारतीयों को निकाला जा सके जो युद्ध के कारण भारत लौटने के इच्छुक हैं।

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