धनबाद। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम), धनबाद की शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कॉन्क्लेव ज्ञान, शोध और उद्योग के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विज्ञान भारती, सीएसआईआर–सिम्फर तथा टेक्समिन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम को इंडस्ट्री–इंस्टीट्यूट समन्वय की एक सशक्त पहल बताया।

राज्यपाल शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ), धनबाद में “स्मार्ट माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन एनर्जी : आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता” विषय पर आयोजित इंडस्ट्री–इंस्टीट्यूट इंटरैक्शन कॉन्क्लेव एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम), धनबाद ने लगभग एक शताब्दी से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खनन, भू-विज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में इस संस्थान का योगदान देश के औद्योगिक विकास की आधारशिला रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, विज्ञान, उद्योग और नीति-निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का एक मंच पर एकत्रित होना अत्यंत सार्थक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्मार्ट माइनिंग और क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों को आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़ें, ताकि विकास टिकाऊ, संतुलित और समावेशी हो।

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड में उपलब्ध कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट सहित अन्य खनिज संसाधन देश की ऊर्जा सुरक्षा, आधारभूत संरचना और विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत @ 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईआईटी (आईएसएम) जैसे संस्थान नवाचार और शोध के प्रमुख केंद्र हैं, जहां से भविष्य की तकनीकों का विकास होगा। जब ज्ञान के साथ राष्ट्र निर्माण का भाव जुड़ता है, तब प्रतिभा देश के लिए सकारात्मक और सशक्त परिवर्तन का माध्यम बनती है।

राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि इस कॉन्क्लेव से निकलने वाले सुझाव और संकल्प देश के औद्योगिक एवं ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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