
रांची। आपदा मंत्री इरफान अंसारी की अध्यक्षता में उनके आवास में गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक हुई। इस दौरान बताया गया कि झारखंड में होनेवाले आकाशीय बिजली गिरने को लेकर सरकार ने नई तकनीक से ऐसी व्यवस्था तैयार किया है। जिससे आकाशीय बिजली गिरने से तीन घंटे पहले चेतावनी घंटी बजेगी। बताया गया कि झारखंड में बीते तीन माह में इससे 431 लोगों की मौत हुई है।



इस अवसर पर मंत्री ने सड़क हादसों को भी आपदा मानने और मृतकों को चार लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की आपदा में एक समान मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए जामताड़ा, दुमका और बरहेट में इलेक्ट्रिकल फील्ड माइल लगाए जाएंगे। जो वायुमंडलीय बदलाव को रिकॉर्ड कर तत्काल पूवार्नुमान देगाा। बैठक में विभाग की ओर से बताया गया कि मारे गए 431 लोगों में आकाशीय बिजली गिरने से 180, पानी में डूबने से 161, सर्पदंश से 80, अतिवृष्टि से नौ और बाढ़ से एक व्यक्ति की मौत हुई है।
बैठक में यह भी बताया गया कि ओलावृष्टि से जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कुल आठ हजार 446 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसमें 447 कच्चे और 20 पक्के मकान पूरी तरह ढह गए। साथ ही 2390 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई। इससे किसान काफी प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग अब प्रत्येक जिले में दो गोताखोरों को विशेष प्रशिक्षण देगाा। साथ ही जलप्रपातों के पास सुरक्षा जालियों की व्यवस्था और एक जीपीएस आधारित एमआईएस और जीआईएस पोर्टल के जरिए नुकसान का डिजिटल आकलन कर राहत राशि पारदर्शी ढंग से दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता अब प्रतिक्रिया से पहले की तैयारी पर है। मंत्री ने कहा कि आपदा को हम रोक नहीं सकते, लेकिन नुकसान को कम जरूर कर सकते हैं। तकनीक, तत्परता और संवेदना ही काम करने की हमारी नई रणनीति है। बैठक में विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

