
नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत अपनी पुरानी और स्पष्ट नीति पर कायम है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत होर्मुज मार्ग के इस्तेमाल के लिए किसी भी पक्ष को कोई शुल्क नहीं देगा। धिकारियों का कहना है कि जब पहले ईरान की ओर से जहाजों पर शुल्क वसूलने की बात कही गई थी, तब भी भारत का यही रुख था और अब भी इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होना चाहिए और सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों को निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही का अधिकार मिलना चाहिए। यह स्थिति ऐसे समय बनी है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा संभालेगा और वहां से गुजरने वाले कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले तक भारत के करीब 60 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होर्मुज मार्ग से होती थी, जो अब घटकर लगभग 20 प्रतिशत रह गई है। भारत ने रूस समेत अन्य स्रोतों से तेल आयात बढ़ाया है। यह तेल यूरोप के रास्ते स्वेज नहर होकर भारत पहुंच रहा है। निजी एजेंसी केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज अब जोखिम वाले क्षेत्रों से बचने के लिए लंबे लेकिन सुरक्षित समुद्री मार्ग अपना रहे हैं। इससे न केवल तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से भविष्य में होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर किसी भी शुल्क या प्रतिबंध का असर भारत पर सीमित रहेगा।
