नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आगामी दो सालों में देश में 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में जलवायु-स्मार्ट खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, पानी और मृदा संरक्षण तथा जोखिम कम करने के व्यावहारिक तरीके अपनाए जाएंगे, ताकि किसान बदलते मौसम में भी सुरक्षित और लाभकारी खेती कर सकें।

चौहान ने गुरुवार को पूसा में पत्रकार वार्ता में आईसीएआर की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ पर मंत्रालय का रोडमैप साझा किया। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में ह्लवन इंस्टिट्यूटझ्रवन ग्रांट इनोवेशनह्व के तहत कम से कम एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक या समाधान देना होगा, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव हो। यह इनोवेशन किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाएझ्र चाहे वह नई फसल वैराइटी, वैक्सीन, डिजिटल टूल या क्लाइमेटझ्रस्मार्ट कृषि मॉडल हो।

उन्होंने कहा कि 100वें स्थापना वर्ष तक आईसीएआर का लक्ष्य होना चाहिए कि कम से कम 10 करोड़ किसानों तक उसकी वैज्ञानिक तकनीकें, नवाचार और आधुनिक कृषि समाधान पहुंचें। उन्होंने इसे विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया। आईसीएआर स्थापना दिवस को किसानों के बीच मनाने के लिए एक पखवाड़े की योजना बनाई जाए, जिसमें हर किसान विकास केंद्र कम से कम 100 गांवों में जाकर अपनी रिसर्च और तकनीक का बड़े स्तर पर प्रदर्शन करे।

चौहान ने किसानों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि नकली और घटिया बीज तथा कीटनाशकों पर सख्त कानून बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी सरल तकनीक और उपकरण विकसित किए जाएं जिनसे खेत में ही बीज और कीटनाशक की गुणवत्ता की तुरंत पहचान हो सके, ताकि किसानों को धोखे से बचाया जा सके और फसल का जोखिम कम हो।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने एफएमडी और अन्य गंभीर पशु बीमारियों पर नियंत्रण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैक्सीन, नई वैराइटीज और तकनीक के जरिए बीज, फर्टिलाइजर और पशु स्वास्थ्य के मामले में आत्मनिर्भर बनना ही आगे का रास्ता है। साथ ही 70 से अधिक एमओयू और टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौतों के जरिए इन तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के सहयोग से तेजी से किसानों तक पहुंचाने की दिशा तय की गई।

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