
रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने हिमांशु शेखर चौधरी को राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आदेश दिया कि इस पद पर अगले आदेश तक किसी की नियुक्ति न की जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि हिमांशु शेखर चौधरी की नियुक्ति राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में फरवरी 2021 में पांच वर्षों के लिए हुई थी लेकिन जुलाई 2024 में उन्हें बिना किसी शोकाज और कार्रवाई के बर्खास्त कर दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से उनको हटाने का कारण विभाग को आय-व्यय की विवरणी समर्पित नहीं करना बताया गया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हिमांशु शेखर चौधरी केंद्र और राज्य सरकार के कानून में जो भी योग्यता की शर्ते हैं उसमें से कोई बिंदु इनके मामले में लागू नहीं होता है। वे इस पद के योग्य हैं। उन्हें बिना शोकाज नोटिस के हटाया जाना नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। इस पर कोर्ट ने उनके बर्खास्त किए जाने के आदेश पर स्थगन आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की जाए। मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट से समय की मांग की गई।
पटना। परिषद के उपसभापति एवं आचार समिति के अध्यक्ष रामवचन राय ने गुरुवार को सदन पटल पर राजद के मुख्य सचेतक डा. सुनील कुमार सिंह की सदस्यता समाप्त करने का प्रतिवेदन रख दिया। आचार समिति ने सुनील की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि सुनिल की सदस्यता पर तलवार लटक गई है।
अब शुक्रवार को सदन में सभापति अवधेश नारायण सिंह द्वारा सुनील सिंह की सदस्यता समाप्त करने की घोषणा औपचारिकता मात्र रह गई है। इससे पहले सदन पटल पर राय द्वारा प्रतिवेदन रखे जाने की सूचना पर नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने विस्तृत जानकारी सभापति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
इस पर सभापति ने कहा कि आपको प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी। वहीं, इसी मामले में दूसरे विधान पार्षद डा. कारी सोहेब को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। दोनों सदस्यों को लेकर की गई अलग अलग अनुशंसा में समिति ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
मुख्यमंत्री के अपमान का है आरोप
सुनील पर सदन में बजट सत्र के दौरान के मुख्यमंत्री का मिमिक्री कर मजाक उड़ाने के मामले में यह कार्रवाई की गई। यह प्रकरण 13 फरवरी को बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सदन में अशोभनीय व्यवहार से जुड़ा हुआ था। जिसमें भीष्म साहनी की मांग पर जांच समिति बनाई गई थी। इसके जांच समिति ने वीडियो की जांच के बाद आरोपों को सत्य पाया था।
समिति ने रिपोर्ट में बताया कि घटना-क्रम के आरोपित दोनों सदस्यों के कृत्य और उसके घनत्व का आकलन किया जाए मो. सोहैब के मुकाबले डा. सुनिल कुमार सिंह का कृत्य अधिक एक गंभीर है। वे बिहार विधान परिषद में पदधारक सदस्य हैं।
मुख्य सचेतक होने के बाद गरिमा को पहुंचाया आघात
समिति ने बताया है कि विपक्ष के मुख्य सचेतक के नाते डा. सुनील कुमार सिंह विधायी जिम्मेदारी नीतियों, नियमों और सदन के संवैधानिक प्राधिकार के प्रति अधिक होनी चाहिए। किंतु अपने आचार और व्यवहार में इन्होंने इसका पालन नहीं किया। सदन के वेल में आकर असंयमित नारेबाजी करने, सदन को बाधित करने, आसन के निर्देश की अवमानना करने, सदन-नेता के प्रति मानहानि-कारक अशिष्ट शब्दों का प्रयोग कर उन्हें अपमानित करने के इनके प्रयास से उच्च सदन की गरिमा को आघात पहुंचा है।
खो चुके हैं सदन में सदस्य बने रहने की पात्रता
समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि डॉ. सुनील कुमार सिंह ने सदन में अपने असंसदीय आचरण और अमर्यादित व्यवहार से सदन के सदस्य बने रहने की पात्रता खो दी है। ऐसे में बिहार विधान परिषद् की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 290 की कंडिका 10 (घ) के अधीन समिति सर्वसम्मति/बहुमत से अनुशंसा की है।
