
नयी दिल्ली/पटना। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा बिहार सरकार के बीच नदी संजीवनी कार्यक्रम के अंतर्गत नदियों एवं अन्य जलस्रोतों से गाद (सिल्ट) हटाने और उसके उपयोग को लेकर मंगलवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित रहे। समझौते के अंतर्गत 243 लाख घन मीटर गाद का उपयोग 16 राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा, जो अभी चालू हैं।



इससे बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, अलबत्ता एक लाख एकड़ नई भूमि मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस भूमि पर मुंबई-दिल्ली की तर्ज पर बिहार में गंगा फेसिंग कालोनियां और घर बनाए जा सकेंगे। यह समझौता बिहार जल-स्रोत जीर्णोद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 के अंतर्गत है, जिसका उद्देश्य ‘गहरी नदियां, मजबूत सड़कें और समृद्ध बिहार’ है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को जहां भी गाद की आवश्यकता होगी, वहां बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराएगी।
इससे नदियों की जलधारण एवं जलप्रवाह क्षमता में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया।सीएम ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से गंगा के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क बनाने का विशेष आग्रह किया।
महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर होगा काम : गडकरी ने कहा कि नदी संजीवनी कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर बिहार की नदियों से गाद हटाने का काम होगा। नदियों का पुनरुद्धार होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इस पूरी परियोजना से बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। परियोजना से बाढ़ प्रबंधन के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सहज होगी।
बिहार की चुनौतियां बनेंगी विकास की शक्ति : मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने अपनी अलग गाद (सिल्ट) नीति बनाई है। बिहार की दो प्रमुख चुनौतियां (अधिक जनसंख्या और अनियंत्रित जल प्रवाह) हैं, जो अब विकास की शक्ति बनेंगी। नदियों से निकलने वाली गाद राज्य के लिए संजीवनी सिद्ध होगी और बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।
39 परियोजनाओं निर्माणाधीन, 11 प्रस्तावित : बिहार में 58,340 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एनएचएआई की 39 परियोजनाएं (कुल 1,561 किमी.) निमार्णाधीन हैं। 1,85,200 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 11 नई परियोजनाएं (1,982 किमी.) प्रस्तावित हैं। विभिन्न नदियों पर 29 नए पुल निमार्णाधीन हैं।
यहां भी होगा उपयोग : मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों से गाद निकाले जाने के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होगी, जिससे मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर बिहार में गंगा फेसिंग कॉलोनियां और घर बनाए जा सकेंगे। राज्य में विकास के कई काम किए जा रहे हैं। 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप (पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुंगेर में अंग, भागलपुर में विक्रमशिला, सहरसा में कोसी, दरभंगा में मिथिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और मां सीता की जन्मस्थली पर सीतापुरम) विकसित किए जा रहे हैं। इन सभी ढांचागत कार्यों, 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में इस गाद का उपयोग होगा।
बिहार को चाहिए गंगा का पर्याप्त पानी : मुख्यमंत्री ने कहा फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है। बांग्लादेश को गंगा जल दिए जाने का बिहार विरोधी नहीं है, लेकिन हमारी आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में बिहार को केवल चार महीने (जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर) ही गंगा जल के उपयोग का अवसर मिलता है। बिहार को कृषि, उद्योग और पेयजल आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होना चाहिए।
समझौते का मुख्य उद्देश्य : इस समझौते का उद्देश्य बिहार की नदियों एवं अन्य जलस्रोतों में जमा गाद का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना है। इससे नदियां पुनर्जीवित और अविरल होंगी तथा निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों एवं अन्य सड़कों के निर्माण में होगा।
एक साथ पूरे होंगे कई लक्ष्य : नदी संजीवनी कार्यक्रम बिहार की प्राकृतिक चुनौतियों को विकास के अवसर में बदलने वाली पहल है। इससे पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और आधारभूत संरचना का विकास एक साथ आगे बढ़ेगा।

