
रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा को रद करने की अधिसूचना को निरस्त करने के आग्रह वाली तीन याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले में झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। उक्त अधिसूचना के तहत राज्य सरकार ने सिविल जज नियुक्ति प्रक्रिया को रद कर दिया है। प्रार्थी आदित्य भास्कर और आयुष कुमार वर्मा सहित अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं में सिविल जज जूनियर डिवीजन की नियुक्ति प्रक्रिया रद करने के सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है।
TDPL की कोई भूमिका नहीं : प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता नीलेश कुमार, अधिवक्ता एके कश्यप, अभय आनंद और सोनल ने पक्ष रखा। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन की उक्त परीक्षा में टीडीपीएल की कोई भूमिका नहीं रही है। इसलिए परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है। ऐसे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद करने संबंधी सरकार के आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए। सीआईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद करने की घोषणा की थी, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका रही थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी। इसी के मद्देनजर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने परीक्षा रद करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और विभिन्न परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने से संबंधित अधिसूचना जारी की थी।

