
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार, 31 जनवरी को संसद में आर्थिक सर्वे (economic survey) पेश किया। सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि 6.3-6.8% रह सकती है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच महंगाई नियंत्रित रहने और उपभोग स्थिर रहने की उम्मीद है। ग्रामीण मांग में भी सुधार की संभावना है। पिछले आर्थिक सर्वे को जुलाई 2024 में आम चुनाव के बाद पेश किया गया था।
आर्थिक सर्वे भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति, सरकारी नीतियों और अगले वित्तीय वर्ष के दृष्टिकोण का संकलन है। इसे आर्थिक मामलों के विभाग की आर्थिक शाखा द्वारा तैयार किया जाता है, जिसके प्रमुख मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) होते हैं। वर्तमान में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन हैं।
- स्थिर रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
FY25 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 6.4% रहेगी, जो दशकीय औसत के करीब है। FY26 में यह 6.3% से 6.8% के बीच रहने की संभावना है। GVA में भी 6.4% वृद्धि का अनुमान है। - खुदरा महंगाई में गिरावट: सरकार के प्रयास और मौसम की चुनौतियां
भारत में FY24 में खुदरा महंगाई 5.4% से घटकर FY25 (अप्रैल-दिसंबर) में 4.9% पर आ गई है। महंगाई में इस गिरावट का मुख्य कारण कोर महंगाई में 0.9% की कमी है, जो मुख्य रूप से कोर सेवाओं और ईंधन की कीमतों में गिरावट से जुड़ी है। सरकार द्वारा बफर स्टॉक को मजबूत करने, ओपन मार्केट में रिलीज और आयात में ढील जैसे कदम महंगाई नियंत्रण में महत्वपूर्ण रहे हैं। FY25 (अप्रैल-दिसंबर) में सब्जियों और दालों का कुल खाद्य महंगाई में 32.3% योगदान रहा। सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण मौसम संबंधी समस्याएं जैसे बाढ़, सूखा, और तूफान हैं, जिनसे आपूर्ति में बाधा आती है। प्याज की कीमतों में FY24 और FY25 में दबाव उत्पादन में कमी के कारण रहा, जबकि टमाटर की कीमतें FY23 से ऊंची बनी हुई हैं, क्योंकि यह जल्दी खराब होने वाला उत्पाद है और इसका उत्पादन कुछ ही राज्यों में केंद्रित है। दालों, तेल बीज, टमाटर और प्याज के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए जलवायु-रोधी फसलों पर रिसर्च और किसानों की ट्रेनिंग की जरूरत है। तूर दाल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई और FY24 में 7.7 लाख टन तूर का आयात किया। RBI और IMF का अनुमान है कि FY26 तक महंगाई दर 4% के करीब आ सकती है। IMF ने FY25 में 4.4% और FY26 में 4.1% महंगाई दर का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक के अनुसार, 2025 में कमोडिटी की कीमतों में 5.1% की गिरावट की संभावना है, जिससे भारत की घरेलू महंगाई में राहत मिल सकती है। - भारत के कृषि क्षेत्र ने दिखाई मजबूती: आर्थिक सर्वेक्षण
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारत के कृषि क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2017 से 2023 के बीच औसतन 5% की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। 2024-25 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5% रही। कृषि और संबंधित क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन (GVA) FY15 के 24.38% से बढ़कर FY23 में 30.23% हो गया। 2024 में खरीफ फसल उत्पादन 1,647.05 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल से 89.37 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें डिजिटल कृषि मिशन, e-NAM और पीएम-किसान शामिल हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को उत्पादन लागत से 1.5 गुना तय किया गया है, जिसमें अरहर, बाजरा, मसूर और सरसों जैसी फसलों पर भारी वृद्धि की गई है। सिंचाई के लिए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत FY16 से FY25 के बीच 95.58 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर किया गया है।
पशुपालन क्षेत्र भी तेजी से विकास कर रहा है, जिसका GVA में योगदान 5.5% है। FY23 में पशुपालन का कुल मूल्य ₹17.25 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें ₹11.16 लाख करोड़ अकेले दुग्ध उत्पादन से आया। मछली उत्पादन भी बढ़कर FY23 में 184.02 लाख टन हो गया, जो FY14 में 95.79 लाख टन था। समुद्री उत्पादों का निर्यात FY24 में ₹60,524 करोड़ तक पहुंच गया।
फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) को उभरता हुआ उद्योग माना जा रहा है, जहां FY25 की पहली छमाही में निर्यात में 14.55% की वृद्धि दर्ज की गई। अंगूर जैसे फलों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई है, जहां FY24 में ₹3,460.70 करोड़ का निर्यात किया गया।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी तेजी देखी गई है। FY24 में कृषि-खाद्य उत्पादों का निर्यात USD 46.44 अरब तक पहुंच गया, जिसमें प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी 23.4% है। सरकार किसानों को e-NWR के माध्यम से फसलों के भंडारण पर ऋण सुविधा भी दे रही है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में 100% e-KYC लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है
- सेवा क्षेत्र की तेज रफ्तार: निर्यात, रोजगार और डिजिटल खपत में जबरदस्त उछाल
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, FY14 में सेवाओं का कुल सकल मूल्य वर्धन (GVA) में योगदान 50.6% था, जो FY25 में बढ़कर 55.3% हो गया है। FY23 से FY25 के बीच सेवा क्षेत्र (service sector) की विकास दर 8.3% रही, जिसने देश की GDP को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। अप्रैल से नवंबर FY25 के दौरान सेवाओं के निर्यात में 12.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई। कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और विनियमों में सुधार को विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के जरिए 19 लाख पेशेवरों को रोजगार मिला है। वहीं, औसत मासिक डेटा खपत भी FY21 में 12.1 GB से बढ़कर FY24 में 19.3 GB हो गई है, जो डिजिटल उपयोग में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
- आर्थिक मजबूती की नई छलांग
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रेडिट ग्रोथ स्थिर बनी हुई है, जिससे बैंकों की मुनाफ़ाखोरी बढ़ी है और NPA में गिरावट आई है। ग्रामीण वित्तीय संस्थानों की संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जहां शुद्ध NPA 3.2% (FY23) से घटकर 2.4% (FY24) हो गया है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात मार्च 2023 में 67.5% से बढ़कर मार्च 2024 में 71.2% हो गया है।
मौद्रिक नीति ने मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए सतत विकास और लिक्विडिटी सुनिश्चित की है। भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों की संख्या पिछले चार सालों में दोगुने से अधिक होकर 4.9 करोड़ (FY20) से 13.2 करोड़ (2024) तक पहुंच गई है। प्राइमरी मार्केट (इक्विटी और डेट) से अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच ₹11.1 लाख करोड़ का संसाधन जुटाया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5% अधिक है।
बीमा क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन हुआ है, जहां FY24 में कुल बीमा प्रीमियम 7.7% बढ़कर ₹11.2 लाख करोड़ हो गया। पेंशन बाजार में तेजी बनी रही, और कुल पेंशन सब्सक्राइबर्स की संख्या सितंबर 2024 में 783.4 लाख तक पहुंच गई। वित्तीय समावेशन सूचकांक मार्च 2021 में 53.9 से बढ़कर मार्च 2024 में 64.2 पर पहुंच गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि स्वतंत्र नियामक संस्थानों में नियामक प्रभाव मूल्यांकन को संस्थागत करना वित्तीय क्षेत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
- प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाने से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगी गति
भारत को अगले 20 साल में तेज ग्रोथ के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश की जरूरत है। पिछले 5 साल में सरकार ने फिजिकल, डिजिटल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया है। पब्लिक फंडिंग से अकेले ये जरूरतें पूरी नहीं होंगी, इसलिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ानी होगी। इसके लिए प्रोजेक्ट प्लानिंग, रिस्क और रेवेन्यू शेयरिंग, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट और विवाद सुलझाने जैसे मामलों में सुधार जरूरी है।
नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन, पीएम-गतिशक्ति जैसी योजनाओं से प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट मिला है, लेकिन कई कोर सेक्टर्स में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कम है। चुनाव और खराब मानसून के कारण Q1FY25 में कैपिटल खर्च धीमा रहा, लेकिन जुलाई-नवंबर 2024 में इसमें तेजी आई और 60% बजट खर्च हो चुका है। अगले महीनों में और तेजी की उम्मीद है। - खेती में क्रांति: सिंचाई, जैविक खेती और सहकारी विकास की नई उड़ान
FY16 से FY21 के बीच सिंचाई क्षेत्र में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जहां यह 49.3% से बढ़कर 55% तक पहुंच गया। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत राज्यों को ₹21,968.75 करोड़ जारी किए गए, जिससे FY16 से FY25 के बीच 95.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में माइक्रो सिंचाई कवरेज हुआ। माइक्रो-इरिगेशन फंड से ₹4,709 करोड़ के लोन स्वीकृत हुए, जिनमें से ₹3,640 करोड़ वितरित किए गए। परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से 14.99 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती को बढ़ावा दिया गया और 25.30 लाख किसानों को इसके लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, 9,000 से अधिक नई प्राथमिक कृषि साख समितियां, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित की गईं, जबकि 35,293 PACS को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
- किसान क्रेडिट, सब्सिडी, और योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
मार्च 2024 तक 7.75 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड एक्टिव हैं। संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना से 5.9 करोड़ किसानों को लाभ मिला और 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम प्रोसेस हुए। जमीनी स्तर पर कृषि क्रेडिट ₹8.45 लाख करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹25.48 लाख करोड़ (2023-24) हो गया। छोटे और सीमांत किसानों की हिस्सेदारी 41% से बढ़कर 57% हो गई है।
वित्त वर्ष 2023-24 में पीएम फसल बीमा योजना में किसानों की संख्या 26% बढ़ी। पीएम-किसान योजना से 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को लाभ मिला, जबकि 23.61 लाख किसान पीएम किसान मानधन योजना में जुड़े। कृषि कार्यों के लिए 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन मिलेंगे।
अभी तक 48,611 स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है और ₹4,795.47 करोड़ की सब्सिडी जारी की गई है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत देश की दो-तिहाई आबादी कवर हो चुकी है। सरकार ने स्मार्ट वेयरहाउस बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
- भारत की शिक्षा प्रणाली में टेक्नोलॉजी और नवाचार का विस्तार
इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, भारत में 14.72 लाख स्कूलों में 24.8 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी शिक्षा के लिए 98 लाख शिक्षक तैनात हैं। 2019-20 के मुकाबले स्कूलों में कंप्यूटर की उपलब्धता 38.5% से बढ़कर 2023-24 में 57.2% हो गई है, जबकि इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत 22.3% से बढ़कर 53.9% हो गया है। स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की दर में भी गिरावट आई है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 1.9%, उच्च प्राथमिक स्तर पर 5.2% और माध्यमिक स्तर पर 14.1% की दर दर्ज की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शिक्षा प्रणाली की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी का समावेश जरूरी है। उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में भी 13.8% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2014-15 में 51,534 थी और 2022-23 में बढ़कर 58,643 हो गई। इसके अतिरिक्त, आर्थिक सर्वे में फाइनेंशियल लिटरेसी और नूमरेसी टारगेट्स को प्राप्त करने के लिए पीयर टीचिंग जैसे नवाचारों को भी प्रमुखता से उजागर किया गया है। - भारत की आर्थिक तरक्की के लिए क्लाइमेट एक्शन और मेंटल हेल्थ पर ध्यान जरूरी
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टार्गेटेड पॉलिसी, फाइनेंसिंग और बड़े ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट की जरूरत बताई है। न्यूक्लियर एनर्जी को फॉसिल फ्यूल्स का विकल्प मानते हुए लो-एमिशन टेक्नोलॉजी और बैटरी स्टोरेज में रिसर्च पर जोर दिया गया है। ‘मिशन LiFE’ को पब्लिक मूवमेंट बनाने के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई है। मेंटल हेल्थ पर सर्वेक्षण में कहा गया है कि खराब जीवनशैली, सोशल मीडिया और जंक फूड का ज्यादा सेवन मानसिक समस्याओं को बढ़ाता है। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने और शारीरिक गतिविधियों से मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है।
