
नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार प्रमुख रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट और बिहार के एनएच को मंजूरी दी। मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा। यह सड़क ठऌ-22 का हिस्सा है और इसकी लंबाई करीब 82.578 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 3,590.73 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत आएगी। इस हाईवे के जरिए मुजफ्फरपुर को सितामढ़ी होते हुए नेपाल सीमा के पास स्थित सोनबरसा से जोड़ा जाएगा। चार लेन बनने के बाद इस मार्ग पर यातायात क्षमता बढ़ने के साथ सफर को भी अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
हाइब्रिड एन्युटी मोड पर होगा काम : बिहार की इस सड़क परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत लागू किया जाएगा। यह परियोजना बिहार के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह उत्तर बिहार को नेपाल सीमा के नजदीकी क्षेत्र से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। बेहतर हाईवे से स्थानीय लोगों के आवागमन के अलावा व्यापार, परिवहन और माल ढुलाई को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
इन पांचों प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत करीब 13,041 करोड़ रुपये है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेल और सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यात्री ट्रेनों के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। इससे महत्वपूर्ण इलाकों में आवागमन आसान होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जिन चार रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनकी कुल अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों से होकर गुजरेंगी। इनके तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर का इजाफा होगा। परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि स्वीकृत चार रेलवे परियोजनाओं में से तीन हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग से संबंधित हैं। जबकि चौथी परियोजना कटक-पारादीप रेल सेक्शन से जुड़ी है। इन परियोजनाओं में हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेलवे लाइन के महत्वपूर्ण हिस्सों का क्वाड्रपलिंग यानी चार लाइन में विस्तार किया जाएगा। वहीं कटक-पारादीप मार्ग पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। रेल मंत्री ने हावड़ा-चेन्नई रूट को देश की बेहद महत्वपूर्ण रेलवे लाइनों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस पूरे कॉरिडोर को चार लाइन वाला बनाया जाएगा। इससे इस मार्ग पर एक साथ ज्यादा ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार में बहुत इंपॉर्टेंट आज हाईवे का प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री ने अप्रूव किया है। यह प्रोजेक्ट एक तरीके से पूरे बिहार के लिए बहुत मेजर लाइफलाइन बन रहा है। यह प्रोजेक्ट नेपाल के बॉर्डर से लेके स्टार्ट होता है।
यात्रियों के साथ माल ढुलाई को भी मिलेगा फायदा : चार लाइन वाला रेल कॉरिडोर बनने से सबसे बड़ा फायदा ट्रेनों के संचालन में होने की उम्मीद है। एक ही मार्ग पर ज्यादा ट्रेनों को चलाने की क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। रेलवे के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यस्त रूट पर यात्री और मालगाड़ियों के बीच संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। इसके अलावा, लाइन के रखरखाव के दौरान भी ट्रेनों के संचालन पर कम असर पड़ने की संभावना है। सरकार का जोर ऐसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में देश की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों से जुड़े पांच बड़े फैसले लिए गए हैं। इनमें पहले चार फैसले रेलवे से संबंधित हैं, जबकि पांचवां फैसला हाईवे सेक्टर से जुड़ा है। चार रेलवे परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये और बिहार हाईवे परियोजना की लागत 3,590.73 करोड़ रुपये है। इस तरह सभी स्वीकृत परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 13,041 करोड़ रुपये बैठती है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि देश के प्रमुख आर्थिक और परिवहन कॉरिडोर की क्षमता भी बढ़ेगी।
2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य
रेलवे की चारों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट पूरी होने के बाद हावड़ा-चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही कटक-पारादीप सेक्शन में भी रेल नेटवर्क मजबूत होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इन फैसलों को केंद्र सरकार ने देश की फाउंडेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
