पटना। अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित पूर्व आईपीएस अमिताभ दास को पुलिस ने किया। उनके खिलाफ चित्रगुप्त नगर थाने में पोक्सो एक्ट के तहत कांड संख्या 44 / 2026 दर्ज किया गया है। जहानाबाद की नाबालिग छात्रा को लेकर इन्होंने टिप्पणी की थी। पुलिस उनका मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई है। शुक्रवार को उनके आवास पर गिरफ्तारी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस पहुंची थी। अमिताभ दास ने मीडिया में सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बयान दिया था। उन्होंने निशांत कुमार का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी। उन्होंने गृहमंत्री सम्राट चौधरी पर विवादास्पद पोस्ट किया था।

शुक्रवार को अमिताभ दास के घर पर पटना पुलिस की टीम पहुंची और छापेमारी की गई। उनके आवास चित्रगुप्त नगर थाने की पुलिस उनके पाटलिपुत्र कॉलोनी में पटना स्काइज अपार्टमेंट में छापेमारी की गई। बताया गया कि इस बीच अमिताभ दास की तबीयत बिगड़ गई। उनके हेल्थ चेकअप के लिए मेडिकल टीम को बुलाया गया। अमिताभ दास पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल की नीट छात्रा रेप-मौत केस में सोशल मीडिया पर भ्रामक और उत्तेजक पोस्ट डालने का आरोप लगाया गया। अमिताभ दास पर छात्रा की निजता का हनन करने का भी आरोप लगा। 3 थानों की पुलिस उनके आवास पर तलाशी और छापेमारी की। अमिताभ दास ने पिछले दिनों मीडिया में कई ऐसे बयान दिए जिससे सनसनी फैल गई। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर भी कई पोस्ट डाले। पुलिस ने उनके पो्स्ट और बयानों की मॉनिटरिंग की तो पाया कि एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत (कथित उत्पीड़न कांड) के चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 44/26 से संबंधित मामले में पूर्व आईपीएस ने तथ्यहीन और भड़काऊ पोस्ट डाले। पुलिस के अनुसार, इन पोस्ट और वीडियो में लगाए गए गंभीर आरोप आरंभिकि छानबीन में तथ्यहीन और भ्रामक पाए गए। अधिकारियों का कहना है कि इन पोस्ट के जरिए पूर्व आईपीएस और उनके कुछ समर्थकों की ओर से मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

पूर्व आईपीएस पदाधिकारी अमिताभ दास ने कहा था कि पटना के शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत के मामले में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का डीएनए टेस्ट करवाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में आने-जाने वाले लोगों का भी सैंपल लेकर जांच करने की आवश्यकता बताई। कहा कि इससे सब साफ हो जाएगा कि दोषी कौन है। यह भी दावा किया था कि इस काम में ज्यादा देर हुई तो बड़े लोगों के द्वारा जांच को प्रभावित किया जा सकता है।

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