पटना। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना लागू करने की तैयारी पूरी हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इस पर वित्त विभाग की सहमति भी मिल चुकी है। अब प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। योजना के तहत चयनित छात्राओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि चार वर्षों तक प्रदान की जाएगी। इस तरह एक छात्रा को चार साल में कुल 4.80 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।

एक हजार छात्राओं को मिलेगा योजना का लाभ : योजना के तहत एक हजार चयनित छात्राओं को हर महीने 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है। छात्राओं का चयन विशेषज्ञों की कमेटी के माध्यम से किया जाएगा। योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में छात्राओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

फेलोशिप की राशि जारी करने के लिए चयनित छात्राओं के शोध कार्य की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रगति की समीक्षा के बाद ही अगली किस्त जारी करने की स्वीकृति दी जाएगी। इससे योजना के तहत शोध कार्य को तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। योजना में चयनित छात्राओं को हर महीने 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह राशि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए मिलने वाली 9 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि से अधिक है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, योजना लागू होने से बिहार में छात्राओं को शोध के लिए अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अगस्त में मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना लागू करने की घोषणा की थी। अब उच्च शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और वित्त विभाग की सहमति भी मिल चुकी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद योजना को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा।

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