पटना। बिहार की समृद्ध कृषि और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर तथा अपनी अनुपम मिठास, मोहक सुगंध और अद्वितीय स्वाद के लिए प्रसिद्ध दीघा का दूधिया मालदह आम अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग की मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है। पवित्र गंगा नदी के तट पर बसी बिहार की राजधानी पटना केवल अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में उपजने वाले स्वादिष्ट फलों के लिए भी विख्यात रही है। इन्हीं में दीघा क्षेत्र का दूधिया मालदह आम अपनी अनूठी मिठास, मनमोहक सुगंध और विशिष्ट स्वाद के कारण विशेष पहचान रखता है। वर्तमान में इसके कुछ पुराने वृक्ष बिहार विद्यापीठ, संत जेवियर्स कॉलेज और कुर्जी फैमिली हॉस्पिटल परिसर में सुरक्षित बचे हुए हैं। इस दुर्लभ प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार इसके लिए जीआई टैग प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत पटना के मीठापुर स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान के माध्यम से दूधिया मालदह आम के प्रमाणित पौधे तैयार किए जा रहे हैं। कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. शिवनाथ दास ने बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दुनियाराम सिंह तथा संस्थान के निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में पिछले दो वर्षों से दूधिया मालदह आम के संरक्षण पर विशेष कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस आम का भौगोलिक क्षेत्र मुख्यत: पटना जिला है, जो गंगा नदी के प्रभाव क्षेत्र में स्थित है। बिहटा में सोन, सोनपुर में गंडक और फतुहा में पुनपुन नदी का गंगा नदी से मिलन होता है। इन नदियों के जल में उपस्थित खनिज तत्व मिट्टी में मिलकर इस आम को विशिष्ट गुण प्रदान करते हैं, जिसके कारण इसके छिलके पर दूधिया आभा दिखाई देती है। डॉ. दास ने कहा कि इसमें कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। यदि इसके छिलके को हल्के से खुरचा जाए तो उंगली पर दूधिया रंग दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि मालदह की विभिन्न किस्मों में दूधिया मालदह को ह्लकिंग आॅफ फ्रूट्सह्व कहा जाता है, क्योंकि इसमें गूदा अधिक तथा गुठली अत्यंत पतली होती है। इसका स्वाद और सुगंध इसे अन्य किस्मों से अलग बनाते हैं। उन्होंने बताया कि बागवानी विशेषज्ञों की प्रयोगशाला जांच में इसका टीएसएस संतुलित पाया गया है, जिसके कारण मधुमेह के रोगी भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इसका सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं। कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. दास ने कहा कि बिहार सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में विलुप्त होती कृषि विरासत के 54 उत्पादों की पहचान की थी, जिनमें दीघा का दूधिया मालदह आम भी शामिल है। इसी क्रम में इस आम को संरक्षित करने के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया शुरू की गई, क्योंकि इसकी वास्तविक गुणवत्ता और स्वाद पटना क्षेत्र की मिट्टी एवं जलवायु से ही विकसित होते हैं। अन्य स्थानों पर उत्पादन संभव होने के बावजूद वैसा स्वाद प्राप्त नहीं हो पाता।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version