
लखनऊ। कभी उत्तर प्रदेश में बेटियों का स्कूल जाना भी मुश्किल था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों में भेजने को मजबूर थे। आज वही बेटियां रात दो बजे भी अपनी ड्यूटी पूरी करके बेखौफ घर लौट रही हैं। यह बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में एक मीडिया संस्थान के यूथ आइकॉन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख किया।



मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के सामने दो बड़े संकट थे। पहला पहचान का और दूसरा सुरक्षा का। प्रदेश के बाहर जाने पर लोग अपनी पहचान छिपाने को मजबूर होते थे और प्रदेश के भीतर सुरक्षा की चिंता सताती थी। आज उत्तर प्रदेश की पहचान उसके प्रतिभाशाली युवाओं, उद्योगों और उपलब्धियों से हो रही है।
योगी ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया का वर्चस्व था। अब माफिया मिट्टी में मिल चुके हैं और अपराधी केला बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया जैसी स्थिति थी, जबकि आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को पहचान मिल रही है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। सरकार पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध करा रही है।
आठ फ्रेम में सुनाई बदले उत्तर प्रदेश की कहानी : मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया पर प्रचलित ‘बिफोर एंड आफ्टर’ रील का उदाहरण देते हुए साढ़े नौ वर्ष में बदले उत्तर प्रदेश की कहानी आठ फ्रेम में सुनाई। पहले फ्रेम में प्रदेश की पहचान और कानून व्यवस्था, दूसरे में सरकारी भर्तियों में सिफारिश के स्थान पर योग्यता को अवसर, तीसरे में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां और चौथे में युवाओं के रोजगार देने वाला बनने की बात रखी। पांचवें फ्रेम में आधुनिक तकनीक, छठे में अर्थव्यवस्था, निवेश और बुनियादी ढांचे, सातवें में आस्था और पर्यटन से रोजगार तथा आठवें फ्रेम में विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह यात्रा युवाओं के विश्वास और अवसरों में आए बदलाव की कहानी भी है।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेटियों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते थे। साधन संपन्न परिवार बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेज देते थे, जबकि गरीब परिवारों की बेटियों के लिए स्कूल जाना भी चुनौती था।
उन्होंने लखनऊ स्थित एचसीएल की महिला कर्मचारियों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर से महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करने आती हैं। हाल ही में उनसे बातचीत के दौरान पूछा था कि रात में घर लौटने में परेशानी तो नहीं होती। महिलाओं ने बताया कि रात दो बजे भी ड्यूटी समाप्त होने पर वे बेखौफ घर लौटती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उदाहरण बताया।

