रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा दुख जताया है। 56 वर्षीय सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से झारखंड की राजनीति में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें सिर्फ वरिष्ठ राजनीतिक साथी नहीं, बल्कि बड़े भाई के समान बताया और कहा कि उनका जाना उनके जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि देर रात उन्हें अपने बड़े भाई और प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की दुखद खबर मिली। उन्होंने कहा कि इस खबर को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है।

हेमंत सोरेन ने कहा कि सोनू कुमार उनके लिए सिर्फ वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे, बल्कि बड़े भाई की तरह थे। वे स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर मुश्किल समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेंगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सुदिव्य कुमार सोनू के झारखंड आंदोलन के दौर से जुड़े योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि सोनू भैया झारखंड आंदोलन के समय से ही स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू ने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।

कल तक आवाज हमारे बीच थी, आज सिर्फ स्मृतियों में रह गई : मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में जीवन की क्षणभंगुरता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज सोनू भैया को याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि जिंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज उनके बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है। हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है और उनकी कमी हमेशा महसूस होगी। उन्होंने कहा कि सोनू के स्नेह, संघर्ष और झारखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को वह जीवनभर अपने साथ लेकर चलेंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में लिखा कि सोनू भैया उन्हें हमेशा याद आएंगे।

1989 में जेएमएम से सार्वजनिक जीवन की शुरूआत : सुदिव्य कुमार सोनू करीब तीन दशक तक जेएमएम से जुड़े रहे। 1989 में सुदिव्य कुमार जेएमएम के प्राथमिक सदस्य बने। इसके बाद 1992 में वो गिरिडीह नगर जेएमएम के संस्थापक अध्यक्ष बने। इसके बाद 2009 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गिरिडीह से जेएमएम टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके बाद फिर 2014 में भी गिरिडीह से चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2024 के चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की

कई विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी : वर्ष 2024 के विधानसभा में लगातार दूसरी बार जीत मिलने पर सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने। सीएम हेमंत सोरेन के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में शामिल होने के कारण उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा के साथ नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग की जिम्मेदारी मिली।

छात्रों के बातचीत में बड़ी भूमिका : उच्च शिक्षा मंत्री होने के नाते सुदिव्य कुमार सोनू ने जेपीएससी-जेएसएससी विवाद के दौरान छात्रों से बातचीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। छात्रों की नाराजगी, परीक्षा में सुधार और जांच से जुड़े मुद्दों पर सरकार के फैसलों की जानकारी छात्रों तक पहुंचा थी। जेपीएससी-जेएसएससी की कई परीक्षाओं को रद्द करने, स्थगित करने और सीआईडी जांच में सुदिव्य कुमार की अहम भूमिका रही।

हेमंत सोरेन से सबसे भरोसेमंद टीम में शामिल : सुदिव्य कुमार सोनू को सीएम हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। सरकार से जुड़े मुद्दों पर वो खुलकार बात करते थे। उनके पास एक साथ कई महत्वपूर्ण विभाग होने से सरकार में उनकी सक्रियता भी लगातार बनी रही है। उनके पास एक साथ कई महत्वपूर्ण विभाग होने से सरकार में उनकी सक्रियता भी लगातार बनी रही। राजनीतिक हलकों में उन्हें हेमंत सोरेन के करीबी और प्रभावशाली नेताओं में माना जाता था। उनकी राजनीतिक अहमियत को देखते हुए समर्थक और पार्टी से जुड़े लोग उन्हें मुख्यमंत्री के बाद प्रमुख चेहरों में गिनते रहे।

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