तिरुवनंतपुरम। भाजप ने केरल विधानसभा चुनाव को लेकर अपना घोषणापत्र मंगलवार को जारी कर दिया। यही बदलाव है, यही विकसित केरल है थीम पर आधारित इस घोषणापत्र में राज्य के समग्र विकास का रोडमैप पेश किया गया हैै, जिसमें बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सामाजिक कल्याण योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तिरुवनंतपुरम स्थित श्री मूलम क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा पत्र जारी किया। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, टीवी-20 पार्टी के मुख्य समन्वयक साबू जैकब, बीडीजेएस के प्रदेश अध्यक्ष तुषार वेल्लापल्ली और तिरुवनंतपुरम के मेयर वीवी राजेश सहित अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

भाजपा ने घोषणापत्र में केरल के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा किया है। इसमें सबसे अहम प्रस्ताव अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना का है, जो राज्य की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है। परिवहन क्षेत्र में पार्टी ने तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का वादा किया है, जिससे राज्य में यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही शहरी भीड़भाड़ को कम करने के लिए तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड में मेट्रो रेल परियोजनाएं शुरू करने की योजना भी पेश की गई है।

भाजपा ने घोषणापत्र में आम जनता, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए कई कल्याणकारी घोषणाएं की हैं। इनमें गरीब परिवारों को हर साल दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, प्रत्येक घर को हर महीने 20,000 लीटर मुफ्त पेयजल, सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करना प्रमुख हैं। इन योजनाओं के जरिए पार्टी ने सीधे तौर पर आम मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।

घोषणापत्र में भाजपा ने कुछ स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। पार्टी ने राज्य में देवस्वम बोर्ड के पुनर्गठन का वादा किया है, जो मंदिर प्रबंधन से जुड़ा अहम मुद्दा है। इसके अलावा सबरीमाला से जुड़े कथित सोना चोरी मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का वादा किया गया है। यह कदम राज्य के धार्मिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया माना जा रहा है।

घोषणापत्र जारी करने के दौरान राजग के सहयोगी दलों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा केरल की पारंपरिक दो-ध्रुवीय राजनीति एलडीएफ और यूडीएफ को चुनौती देने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। साबू जैकब और तुषार वेल्लापल्ली जैसे नेताओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि गठबंधन स्तर पर भी भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

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