पटना। भाजपा कई केंद्रीय मंत्रियों , सांसदों, पूर्व सांसदों को चुनावी जंग में उतारने पर विचार कर रही है। बिहार विधानसभा का चुनाव केंद्रीय मंत्री अमित शाह के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। बिहार विधासनसभा चुनाव का चेहरा भले राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हो, पर इस अभियान की ड्राइविंग सीट पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह बैठे हैं। और कहा जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमिता शाह इंटेलिजेंस की रिपोर्ट को लेकर परेशान हैं। कई विधायकों पर एंटी इनकंबेसी का खतरा मंडरा रहा है तो कुछ विधायकों के प्रति जनता की काफी नाराजगी दिख रही है। ऐसे में एक रणनीति के तहत कुछ खास खास महत्व वाली सीटों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीजेपी के नामचीन बड़े नेताओं को जंग में उतारकर हर हाल जीत सुनिश्चित करने की सोच रहे हैं।

पूर्णिया से दिलीप जायसवाल: बिहार विधानसभा के चुनावी जंग में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल के भी उतरने की संभावना प्रबल है। वैसे यह सीट बीजेपी की है। यहां से विजय खेमका विधायक हैं। इनके खिलाफ नाराजगी काफी है। इधर पप्पू यादव के कांग्रेस से बढ़ते संबंध के बाद पूर्णिया विधानसभा की लड़ाई काफी मुश्किल हो गई है। इसलिए बीजेपी डॉ. दिलीप जायसवाल पर किस्मत आजमाने को सोच रही है।

बेगूसराय से गिरिराज सिंह: बीजेपी के रणनीतिकार बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह को विधासनसभा 2025 की जंग लड़नी पड़ सकती है। वजह बिलकुल साफ है कि बीजेपी हर हाल में जीत सुनिश्चित करना चाहती है। फिलहाल यहां से बीजेपी के कुंदन कुमार विधायक हैं।

राघोपुर से नित्यानंद राय : राघोपुर विधानसभा से राजद के युवराज और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विधायक हैं। ये राजद का गढ़ रहा है। बीजेपी हर हाल में जीत को देखते केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद सिंह को चुनाव लड़ाना चाह रही है। वैसे एक बार जदयू के टिकट पर सतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को राघोपुर से परास्त किया था। पूर्व विधायक सतीश कुमार अभी बीजेपी में हैं।

नरकटियागंज से सतीश दुबे : केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे भी विधासनसभा जंग लड़ते दिख जाए तो आश्चर्य नहीं। बीजेपी के रणनीतिकार इन्हें नरकटियागंज से उतारना चाहती है। यहां से तो वैसे भाजपा की रश्मि वर्मा विधायक हैं। पर पिछले दिनों इनका झुकाव राजद की तरफ हो गया था। शक्ति परीक्षण के समय इनका आचरण पार्टी विरुद्ध माना गया था।

छपरा से राजीव प्रताप रूडी: छपरा विधानसभा को राजद के कब्जे से छुड़ाने को संभव है कि बीजेपी के रणनीतिकारों को राजीव प्रताप रूडी को विधानसभा के चुनावी जंग में उतारना पड़े। छपरा से बीजेपी के सीएम गुप्ता विधायक हैं। यहां से पिछली बार आरजेडी रणधीर कुमार को हराया था।

दानापुर से रामकृपाल यादव : बीजेपी के रणनीतिकार इस बार दानापुर की ‘जंग’ में पूर्व सांसद रामकृपाल यादव को उतार कर जीतना चाहती है। यहां से राजद के रीत लाल यादव विधायक हैं। इनके विरुद्ध रामकृपाल यादव को उतार कर जीत सुनिश्चित करना चाहती है।

औरंगाबाद से सुशील सिंह : औरंगाबाद से कांग्रेस के आनंद शंकर सिंह विधायक हैं। इन्हें हराने के लिए बीजेपी पूर्व संसद सुशील कुमार सिंह को चुनावी जंग में उतारने का मन बना रही है।

भागलपुर से अश्वनी चौबे : भागलपुर विधासनसभा से कांग्रेस के अजीत शर्मा काफी दमदार उम्मीदवार हैं। वर्तमान ने अजीत शर्मा विधायक भी हैं। इन्हें परास्त करने बीजेपी के रणनीतिकार पूर्व मंत्री अश्वनी चौबे को उतारने जा रही है।


किशनगंज से शहनवाज हुसैन: किशनगंज अभी कांग्रेस के हवाले हैं। यहां से इजरायल हुसैन कांग्रेस के विधायक हैं। बीजेपी इस बार चुनावी जंग जीतने के लिए पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन को उतारना चाह रही है। वैसे एक जानकारी यह भी मिल रही है कि शाहनवाज हुसैन ने अपनी रुचि अररिया और भागलपुर विधानसभा के बारे में प्रकट की है।

पटना साहिब से सम्राट चौधरी : चर्चा तो यह भी है कि सम्राट चौधरी पटना साहिब से चुनावी जंग लड़ सकते हैं। पटना साहिब से नंदकिशोर यादव कई बार से विधायक रहे हैं। पर उम्र को देखते इन्हें चुनाव नहीं लड़वाया जा सकता है। पटना साहिब में कुशवाहा की संख्या ज्यादा है। इस लिहाजन सम्राट चौधरी चुनावी जंग में उतर सकते हैं। इनकी दूसरी इच्छा खगड़िया विधानसभा से लड़ने की भी है। खगड़िया से कांग्रेस के छत्रपति यादव विधायक हैं।

जीरादेई से मंगल पांडेय : राज्य के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय जीरादेई विधानसभा से चुनाव लड़ सकते हैं। यहां से सीपीई के अमरजीत कुशवाहा विधायक हैं। वैसे मंगल पांडेय को सिवान लड़ने की भी चर्चा है। लेकिन मंगल पांडेय की अपनी।इच्छा कुम्हार विधानसभा से चुनाव लड़ने की है।

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