नई द‍िल्‍ली। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा क‍िया क‍ि भारत युद्ध में परखी जा चुकी ‘जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम’ को खरीदने की योजना बना रहा है। यह कदम अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा और दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं के नए रास्ते खोलेगा। अमेरिकी राजदूत गोर ने अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में इसकी जानकारी साझा की। राजदूत ने ल‍िखा, “भारत युद्ध में परखे जा चुके ‘जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम’ को खरीदने की योजना बना रहा है, जैसा कि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मई 2026 के ‘शांगरी-ला डायलॉग’ में कहा था। यह कदम अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) की संभावनाओं के भी नए रास्ते खुल सकते हैं।” गोर ने कहा क‍ि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग का स्तर इस समय रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। इससे पहले अमेर‍िकी राजदूत ने नई दिल्ली स्थित गांधी स्मृति में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और गांधी स्मृति संग्रहालय का दौरा किया।गोर ने अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में लिखा, “गांधी स्मृति जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना मेरे लिए सम्मान की बात है। सत्य, अहिंसा और शांति के उनके मूल्य हम सभी को प्रेरित करते हैं।” इस दौरान गोर ने अपने व‍िदेश‍ी सहयोग‍ियों से मुलाकात की जानकारी ‘एक्स’ पोस्‍ट में साझा की। गोर ने ल‍िखा, ”हमारे सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन, ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून, कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक राटा से मुलाकात कर बेहद खुशी हुई।” राजदूत गोर ने बताया क‍ि हमेशा की तरह यह बातचीत उपयोगी और सार्थक रही, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।क्या है जैवलिन?जैवलिन एक पोर्टेबल, एक व्यक्ति द्वारा कंधे से दागी जाने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे अमेरिकी कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और RTX के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल सैनिक दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं।इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है?जैवलिन को खास तौर पर इसकी फायर एंड फॉरगेट तकनीक के लिए जाना जाता है। यानी लक्ष्य को लॉक करने के बाद मिसाइल दागी जाती है और उसके बाद ऑपरेटर को लगातार उसे गाइड करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे सैनिक मिसाइल लॉन्च करने के तुरंत बाद अपनी पोजीशन बदल सकते हैं। इसमें टॉप अटैक क्षमता भी है। इसमें मिसाइल टैंक के ऊपर से हमला कर सकती है, जहां आमतौर पर टैंक का कवच अपेक्षाकृत कमजोर होता है। जरूरत के मुताबिक इसे सीधे हमले के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।भारत के लिए क्यों अहम?भारत के पास पहले से कई स्वदेशी और विदेशी एंटी-टैंक हथियार हैं। जैवलिन के शामिल होने से भारतीय सेना की मोबाइल एंटी-आर्मर क्षमता और मजबूत हो सकती है। यह खास तौर पर ऐसे इलाकों में उपयोगी हो सकता है जहां सैनिकों को तेजी से दुश्मन के टैंक या बख्तरबंद वाहनों का मुकाबला करना हो।

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