
रांची। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गंभीर आरोपों से भरा पत्र लिखते हुए राज्य की जेल प्रशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। पत्र में उन्होंने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण, उसके गर्भवती होने और पूरे मामले को दबाने के लिए उच्च अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
मरांडी ने पत्र में कहा कि प्रशासनिक सूत्रों से जानकारी मिली है कि जेल परिसर के भीतर एक महिला कैदी का लगातार मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह शोषण जेल के सर्वोच्च पद पर बैठे काराधीक्षक द्वारा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप महिला कैदी गर्भवती हो गई है। नेता प्रतिपक्ष ने इसे राज्य की कानून-व्यवस्था और जेल प्रशासन की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि जिस स्थान पर कैदियों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित होना चाहिए, वहीं अपराध और शोषण को संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक तंत्र इसे दबाने में जुट गया। कारा महानिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी इस पूरे प्रकरण को रफा-दफा करने, फाइलों को गायब करने और संबंधित काराधीक्षक को संरक्षण देने में लगे हुए हैं। मरांडी ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि जेल के भीतर लंबे समय से चल रहे ह्लसंगठित आपराधिक तंत्रह्व का हिस्सा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि मामले को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए जेल कर्मचारियों और संभावित गवाहों को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने पर धन और रिश्वत का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रभाव और सत्ता के बल पर सच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो प्रशासनिक व्यवस्था के चरित्र को उजागर करता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री सोरेन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा आरोपित काराधीक्षक और कारा महानिरीक्षक के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह माना जाएगा कि राज्य सरकार और शीर्ष अधिकारी इस पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।
