
रांची। जगन्नाथपुर थाने में राधा स्वामी संगठन की आड़ में वाहन, आवास, कन्यादान, करोड़पति और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में 12 लोगों को नामजद किया गया है। गिरिडीह सहित झारखंड के कई जिलों में संगठन के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज होने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने रांची में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता डॉ. संतोष कुमार के आरोप के अनुसार, रांची के हटिया स्थित संगठन के प्रदेश कार्यालय से लोगों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर उनसे रकम जमा कराई जाती थी। वाहन ईएमआई योजना के तहत वाहन खरीदने वालों को ईएमआई में 40 से 90 प्रतिशत तक छूट दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके अलावा कन्यादान योजना, करोड़पति योजना, एफएमसीजी योजना, छात्रवृत्ति और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी दावा किया जाता था।
जगन्नाथपुर थाने में दर्ज एफआईआर में बिनू साहू, शकुंतला कुमारी, दीपक कुमार शर्मा, दीपक शर्मा, रश्मि कुमारी, अरुण कुमार प्रजापति, मुकेश सिन्हा, अनीषा सिन्हा, जूली सिन्हा, सतीश कुमार शर्मा, काजल श्रीवास्तव और गौरव श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। शिकायत में आरोपितों को संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, केंद्रीय जोनल प्रभारी और सीईओ सहित विभिन्न पदों पर बताया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि लोगों का विश्वास जीतने के लिए बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद की उपस्थिति वाले वीडियो भी दिखाए जाते थे। इससे लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि संगठन से बड़े लोग जुड़े हैं और उनका पैसा सुरक्षित रहेगा।
एफआईआर के अनुसार, कुछ लोगों को आरएसएबीएन निधि लिमिटेड के बैंक बचत खाते की पासबुक भी दिखाई गई। आरोप है कि इसके माध्यम से संगठन की गतिविधियों को वैध और सुरक्षित बताकर लोगों को रकम जमा करने के लिए प्रेरित किया गया। वाहन योजना के तहत यह आश्वासन भी दिया जाता था कि बैंक से वाहन खरीदने के बाद उसकी निर्धारित ईएमआई संगठन की ओर से जमा की जाएगी।
शिकायत के मुताबिक, इन आश्वासनों पर भरोसा कर लोगों ने नकद, ऑनलाइन भुगतान और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए आरएसओजी फूड कॉस्मेटिक प्राइवेट लिमिटेड के विभिन्न बैंक खातों में रकम जमा की। शिकायतकर्ता ने इसे करोड़ों रुपये की राशि बताया है। रकम जमा करने वाले लाभुकों की नामवार सूची, जमा राशि और बैंक लेनदेन का विवरण भी शिकायत के साथ संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसकी गाड़ी की ईएमआई का भुगतान बंद हो गया तो उसने संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क किया। आरोप है कि उसे लगातार यह आश्वासन दिया गया कि संगठन को केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की योजनाओं से राशि मिलनी है और राशि प्राप्त होने के बाद सभी लाभुकों की ईएमआई का भुगतान कर दिया जाएगा।

